
आ ही गए रघुनंदन....मंगल गाओ रे....:
भगवान राम की महिमा जितनी अपार है, हनुमानजी की भक्ति भी उतनी ही अथाह है। शहर का देवीपुरा बालाजी मंदिर उसी परमभक्ति का प्रतीक है। जो कभी रघुनाथजी का मंदिर था। पर हनुमानजी की भक्ति का ऐसा चमत्कार हुआ कि उन्हें भी उनके अराध्य की शरण में ही अधिस्थापित करना पड़ा। तब से ये मंदिर भी रघुनाथजी की जगह उनके बालाजी के नाम से ही प्रसिद्ध हो गया।
मंदिर के साथ खुद ब खुद रुक गई मूर्ति
इतिहासकार महावीर पुरोहित के अनुसार सीकर में संवत 1820 से 1852 तक राव देवीसिंह का शासन था। उन्होंने देवीपुरा गांव बसाकर यहां रघुनाथजी का मंदिर बनवाया था। इसके बाद एक दिन रघुनाथगढ़ से हनुमानजी की मूर्ति बैलगाड़ी पर मारवाड़ जा रही थी। रघुनाथजी का मंदिर आते ही उस गाड़ी के पहिए थम गए। बहुत कोशिश पर भी गाड़ी नहीं चली तो राजा देवी सिंह ने पंडितों को बुलाया। उन्होंने हनुमानजी की इच्छा रघुनाथजी की सेवा में ही रहने की बताते हुए मूर्ति को मंदिर में ही प्रतिष्ठित करने का सुझाव दिया। जिसके बाद हनुमानजी की मूर्ति को मंदिर में प्रतिष्ठित कर दिया गया। तब से ये मंदिर देवीपुरा रघुनाथजी की जगह देवीपुरा बालाजी कहलाने लगा।
आंख चोरी पर बहे आंसु
महंत ओमप्रकाश शर्मा ने बताया कि मंदिर में भी हनुमानजी ने कई चमत्कार दिखाए हैं। जुलाई 1977 में हनुमानजी की आंख चोरी हो गई थी। जब सुबह पट खोले तो मंदिर की जमीन गीली और हनुमानजी की आंखों से आंसू बहते दिखे। जिसकी चर्चा फैली तो मंदिर के प्रति लोगों की आस्था और बढ़ गई। मंदिर में हनुमान जयंती व राम नवमी सहित विभिन्न अवसरों पर धार्मिक आयोजन होते हैं।
Published on:
20 Jan 2024 12:49 pm
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