
सीकर. जैसलमेर व बीकानेर स्थित इंदिरा गाधी नहर सिंचित क्षेत्र में पूर्व सैनिकों को जमीन देने के 1984 की घोषणा को 33 साल के लम्बे इंतजार के बाद अब जाकर मूर्त रूप मिल सका है। 622 पूर्व सैनिकों के परिवारों को सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में आए आदेश के बाद अब जमीन आवंटन हो सकेगा। हाईकोर्ट के 20 मार्च 2017 को जवानों के पक्ष में दिए फैसले पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी याचिका दायर की
मामला एक नजर...
सैनिक कल्याण के तहत 1984 में इंदिरा गांधी नहर जैसलमेर व बीकानेर जिलों में स्थित सिंचित जमीन देने के फैसले के तहत सिपाही से लेकर सूबेदार मेजर रैंक तक के सैनिकों को एक साल में जमीन आवंटन होना था। 2004, 2006 व 2007 में हुए आवंटन को एक साथ 19 जून 2007 को निरस्त कर दिया गया। लंबे अंतराल में कई भूतपूर्व सैनिकों की मौत हो गई। भूतपूर्व सैनिकों के परिवार को बीकानेर उपनिवेशन विभाग ने उन्हें यह कहकर लौटा दिया कि केवल जीवित जवानों क ो ही मुरबा मिलता है।
सर्वोच्च अदालत ने दिया पक्ष में फै सला
हाईकोर्ट के 20 मार्च 2017 को जवानों के पक्ष में दिए फैसले पर सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट ने 4 दिसंबर 2017 को सरकारी की अपील को खारिज करते हुए जवानों के पक्ष में फैसला किया। उधर 18 दिसंबर को राज्य सरकार की झुंझूनुं रैली में इसकी घोषणा भी की गई। गौरव सेनानियों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में जोधपुर हाईकोर्ट के अधिवक्ता पप्पू सांगवा ने पैरवी की।
पेश होंगे दस्तावेज
आवंटित जमीन प्राप्त करने के लिए भूतपूर्व सैनिक के परिजनों को संबंधित जिला सैनिक कल्याण बोर्ड कार्यालय में जमीन आवंटन से संबंधित कागजात, मृत्यु प्रमाण पत्र, वारिस नामा आदि देने होंगे। उसके अलावा कोर्ट के आदेश लेकर वकील का भी सहारा ले सकते हैं। इन जमीनों का आवंटन बीकानेर उपनिवेशन विभाग से होगा।
पेश करें कागजात ...जमीन का आवंटन बीकानेर उपनिवेशन के द्वारा किया जाएगा। सैनिकों को दस्तावेज जिला सैनिक कल्याण कार्यालय में भी जमा कराने होंगे। जिसके बाद प्रक्रिया संभव होगी।
कर्नल एसएम सैनी, जिला सैनिक कल्याण अधिकारी, सीकर
Published on:
09 Jan 2018 09:34 am
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