
Surat businessman Help to Poor family in sikar
सीकर. बचपन मुफलिसी में गुजरा। बदहाली के दौर से गुजरकर जब वह काबिल बना, तो एक जिद को भी पनपा लिया। जिद थी कि समाज के गरीब तबके के हालात को सुधारने की। कारोबार बढ़ा, तो इस दिशा में कदम बढ़ाया। गांव की सरकारी स्कूल के सभी बच्चों को यूनिफॉर्म के साथ ही बच्चों के लिए लाखों की कीमत की बस भी दान कर दी। ये शख्स है पलथाना निवासी गिरवरसिंह शेखवत। अब उन्होंने घोषणा की है कि वे अपनी सालाना कमाई का आधा हिस्सा समाज सेवा के कार्यों में लगाए गए।
दुआओं से हुआ ठीक
सूरत में ट्रेवल एजेंसी का कारोबार करने वाले गिरवरसिंह बताते हैं कि कुछ साल पहले वह पीलिया और लीवर में इन्फेक्शन समेत कई गंभीर बीमारियों से पीडि़त हो गए थे। चिकित्सक और सारी दवाएं उन्हें जवाब दे चुकी थे।
ऐसे में उन्हें पैसों के महत्वहीन होने का अहसास हुआ और उन्होंने अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा समाज सेवा में लगाना शुरू कर दिया। बकौल गिरवर सिंह उसके बाद से उन्हें लोगों की इतनी दुआएं मिलने लगी। फिर से स्वस्थ महसूस करने लगे हैं और लाखों की कमाई का आधा हिस्सा समाज के नाम कर चुके हैं।
बस के बाद बच्चों के लिए बनाएंगे हॉल
स्कूली बच्चों की समस्या को देखते हुए गिरवरसिंह ने हालिया पलथाना की राजकीय उच्च माध्यमिक स्कूल के लिए बस भेंट की थी। इसी स्कूल में बच्चों के बैठने के लिए जब स्कूल की ओर से कमरे निर्माण की मांग की गई तो उन्होंने कमरे की बजाय बड़े हॉल के निर्माण की घोषणा कर दी।
उनका कहना है कि बच्चों को बस में बैठकर आता देख उन्हें जो सुकून मिलता है, वही उन्हें स्कूल विकास के लिए कदम बढ़ाने की प्रेरणा दे रहा है। गांव के स्कूल विकास में आगे बढऩे के पीछे वह पलथाना स्कूल के शिक्षक और राजस्थान शिक्षक संघ शेखावत के प्रदेश महामंत्री उपेन्द्र शर्मा की भूमिका को भी बेहद अहम बताते हैं।
लावारिस शव का उठाते हैं खर्च
48 वर्षीय गिरवरसिंह की सेवा में जाति या मजहब का कोई मोल नहीं। वह बिना किसी भेदभाव के समाज सेवा में जुटे हैं। यही वजह है कि वह सूरत में मदीना मस्जिद के लिए भी चंदा दे चुके हैं तो वल्साड से सूरत तक ट्रेन हादसे का शिकार होने वाले हर लावारिश की अंतिम क्रिया का खर्च भी उठाते हैं। सामाजिक और धार्मिक कार्यों में वे अहम भूमिका निभा रहे हैं।
Published on:
08 Aug 2018 11:56 am
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