
तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती: बाहरी अभ्यर्थियों को झटका, हमारे युवाओं की मौजा-मौजा
अजय शर्मा.
सरकार की ओर से पिछले चार साल से सरकारी भर्तियों में राजस्थानी बेरोजगारों को प्राथमिकता देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन बेरोजगारों को अभी तक स्थायी राहत नहीं मिली है। दूसरी तरफ राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से जारी तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के सिलेबस और परीक्षा के प्रश्न पत्रों से बेरोजगारों को थोड़ी राहत मिली है।सोमवार तक प्रथम व द्वितीय लेवल में छह पारियों में परीक्षा हो चुकी है। इनमें राजस्थानी भाषा में पहली बार प्रश्न पूछे जा रहे हैं।इससे राजस्थान के बेरोजगारों को सीधे तौर पर फायदा मिल रहा है।इससे दूसरे राज्य के अभ्यर्थियों को झटका लगा है। वहीं तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में सिलेबस में राजस्थानी कला, साहित्य, इतिहास, संस्कृति, भूगोल आदि को सिलेबस में काफी महत्व दिया गया। इस वजह से भी राजस्थान के बेरोजगारों को इस भर्ती में फायदा मिल रहा है। बेरोजगारों का कहना है कि तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती में संबंधित विषय के साथ लगभग आधे अंकों के प्रश्न राजस्थान से संबंधित पूछे जा रहे है। इससे यहां के बेरोजगार दूसरे राज्याें के अभ्यर्थियों को नौकरी की दौड़ में कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
अंक भार का गणित बिगड़ा, फिर भी बेरोजगार खुश
तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती की छह पारियों में से चार में सिलेबस के हिसाब से अंक भार का गणित पूरी तरह बिगड़ा हुआ नजर आया।इसके बाद भी प्रदेश के बेरोजगारों में उत्साह है।बेरोजगारों का कहना है कि कई टॉपिकों से तय अंकों से कम प्रश्न पूछे गए। इसका फायदा भी प्रदेश के बेरोजगारों को मिला है।
नवाचार: राहत की उम्मीद
बेरोजगारों का कहना है कि इस साल सरकार ने बजट में एक लाख भर्तियां कराने का ऐलान किया है। यदि सरकार की ओर से शिक्षक भर्ती की तरह सिलेबस में राजस्थानी टॉपिकों को वैटेज दिया जाए तो राहत मिल सकती है।बेरोजगार संगठनों की ओर से भी लगातार सिलेबस में बदलाव की मांग भी उठाई जा रही है।
नुकसान: पिछली पांच भर्तियों में ज्यादा नुकसान
पिछली रीट, वरिष्ठ अध्यापक, शारीरिक शिक्षक, कम्प्यूटर शिक्षक, सीएचओ सहित अन्य भर्तियों में यहां के अभ्यर्थियों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। इन भर्तियों 15 से 25 फीसदी तक दूसरे राज्यों के बेरोजगार युवा शामिल हुए। बेरोजगार संगठनों का कहना है कि सिलेबस की वजह से दूसरे राज्य के अभ्यर्थियों को फायदा मिला।
एक्सपर्ट व्यू.....
सरकारी नौकरियों में बाहरी अभ्यर्थियों को रोकने के लिए मध्यप्रदेश सरकार कानून बना चुकी है। राज्य सरकार को भी इस दिशा में कानूनी पक्षों का ध्यान रखते हुए नियमों में बदलाव करना चाहिए जिससे राजस्थान के युवाओं को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता मिल सके।तृतीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के सिलेबस से जरूर राजस्थान के बेरोजगारों को राहत मिली है। सरकार को अन्य भर्तियों के सिलेबस में भी राजस्थान से संबंधित टॉपिकों को प्राथमिकता देनी होगी।
विपिन शर्मा, भर्ती मामलों के विशेषज्ञ
Published on:
28 Feb 2023 12:18 pm
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