23 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मंदबुद्धि मामा को देख बनाई योजना, अब घर-घर से मंदबुद्धि बच्चों को ढूंढकर निशुल्क पढ़ा रहा कृष्ण

Teachers Day 2019 : मंदबुद्धि मामा कमलेश को देख 20 साल के कृष्ण कुमार ने कठिन परिश्रम कर बिजली ग्रिड के पास रानोली में मंदबुद्धि और दिव्यांग बच्चों में पढ़ाई की अलख जगा रहा है।

2 min read
Google source verification

सीकर

image

Naveen Parmuwal

Sep 05, 2019

Teachers Day: मंदबुद्धि मामा को देख बनाई योजना, अब घर-घर से मंदबुद्धि बच्चों को ढूंढकर निशुल्क पढ़ा रहा कृष्ण

Teachers Day: मंदबुद्धि मामा को देख बनाई योजना, अब घर-घर से मंदबुद्धि बच्चों को ढूंढकर निशुल्क पढ़ा रहा कृष्ण

रविन्द्र सिंह राठौड़, सीकर.

Teachers Day 2019 : मंदबुद्धि मामा कमलेश को देख 20 साल के कृष्ण कुमार ने कठिन परिश्रम कर बिजली ग्रिड के पास रानोली में मंदबुद्धि और दिव्यांग बच्चों में ( Krishan Teach Retarded and Disabled Children in Sikar ) पढ़ाई की अलख जगा रहा है। कृष्ण ने पहले खुद को ऐसे विशेष योग्यजन बच्चों को पढ़ाने के लिए दो साल डिप्लोमा किया। डिप्लोमा होने के बाद कृष्ण ने रानोली और पलसाना में पहले घर-घर जाकर सर्वे किया। बच्चों के परिजनों ने पहले यह कहकर मनाकर दिया कि हम इन्हें संभाल नहीं पा रहे तुम क्या पढ़ाओंगे। लेकिन जब कृष्ण ने परिजनों से समझाइश की तो शुरूआत में दो बच्चे आने लगे। वर्तमान समय में स्कूल में 9 बच्चे अध्ययनरत है।


10 हजार रुपए देकर शिक्षक भी लगाया
बच्चों को पढ़ाने के लिए कृष्ण ने एक सुनिता नाम की शिक्षक को 10 हजार रुपए महीना भी देना भी शुरू कर दिया हैं। बच्चों को घर से लाने ले जाने का खर्चा भी खुद ही वहन कर रहे है। बच्चों को लाने के लिए अपने खर्चे पर एक वैन भी लगाई है। ताकि रोजाना बच्चे रोजाना आ सके। कृष्ण हर महीने इस तरह इन मंदबुद्धि और दिव्यांग बच्चों की पढ़ाई पर खर्च कर रहा है।


कहां से मिली प्रेरणा
कैरपुरा-खंडेला में कृष्ण कुमार के मामा कमलेश रहते हैं। वे जन्म से ही मंदबुद्धि हैं। परिजनों नेे काफी बाबाओं से झाड़ फूंक और डॉक्टरों से इलाज करवाया। इसके बावजूद कोई लाभ नहीं हुआ। आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण और कोई विशेष व्यवस्था नहीं होने से वे पढ़ नहीं पाए। इसके कारण पूरे परिवार का भार छोटे भाई महेंद्र पर आ गया। महेंद्र भी कोल्ड ड्रिंक बेचता है। पूरे परिवार को घर पर उसकी निगरानी करनी पड़ती है। खुद के मामा को ऐसी स्थिति में देखकर कृष्ण को मंदबुद्धि बच्चों को पढ़ाने का विचार आया। तब उसके पिता सीताराम ने उसे पढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विशेष योग्यजन कल्याण व पुनर्वास समिति का गठन किया। जिसके तहत सेंटर शुरू कर बच्चों को लाने का काम करने लगे।