
सीकर.
गर्मी का प्रचंड दौर शुरू होते ही शहर में फलों के राजा आम की महक फिजां में घुल गई है। जगह-जगह ठेलों पर आम सजे नजर आ रहे हैं। लोगों के भोजन में आम व आम के बने व्यजंन शुमार हो गए हैं। सीकर मंडी में आम के छह बडे विक्रेता हैं जिनके यहां इन दिनों औसतन प्रतिदिन दस हजार किलोग्राम से अधिक आम आ रहे हैं। खास बात ये है कि यहां का आम सीकर जिले सहित चूरू, तारानगर, साहवा, झुंझुनूं व बीकानेर के सीमावर्ती इलाकों तक जा रहा है।
रोक है पर कैसे दें लिक्विड
एथीलीन फलों को पकाने के लिए लिक्विड एथीलीन को काम में लिया जा सकता है लेकिन सीकर मंडी में आने वाले अधिकांश फल कार्बाइड से ही पकाए जा रहे हैं। खास बात ये है कि कार्बाइड से असाध्य रोगों बढ़ते हैं लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर कार्रवाई तक नहीं करता है। थोक व्यापारियों ने बताया कि आम को पकाने का विकल्प नहीं होने के कारण आम की पैकिंग डिब्बो में होती है इसलिए लिक्विड एथीलीन का छिडकाव नहीं हो पाता है। ऐसे में मजबूरी में किसान खेतों से ही आम के डिब्बों में कार्बाइड लगा देता है।
देते हैं कार्बाइड
प्रमुख कारण होने के सीकर मंडी में अधिकांश फल जयपुर , दिल्ली या अन्य दूसरे राज्यों से आते हैं। इनमें केला, आम, मौसमी, पपीता प्रमुख है। फलों के बगीचे से कच्चे फल तोडकऱ डिब्बों में पैकिंग कर दी जाती है। जहां से उत्पादक किसान ही वेल्डिंग में काम आने वाले कार्बाइड की करीब 20 ग्राम की पुडिया रख देता है। महज छह घंटे में कार्बाइड से निकली गैस कच्चे आम को पक्के आम में बदल देती है। इसके बाद ये आम थोक मंडी से सीधे बाजार में चले जाते हैं।
आम से दूर है अभी आम
मई का पहला सप्ताह निकल चुका है और अभी भी आम आदमी की पहुंच से दूर है। थोक विक्रेता रामचन्द्र ने बताया कि थोक मंडी में इस समय 28 से 35 रुपए प्रतिकिलोग्राम के भाव से बेचा जा रहा है। जबकि खुदरा में ये आम 50 से 60 रुपए तक बोले जा रहे हैं। आम के भाव अभी अधिक है। अगले पखवाडे तक उत्तरप्रदेश से आम की आवक होने के साथ ही भावों में गिरावट आ जाएगी। हालांकि आम की शुरूआती आवक को देखते हुए इस बार आम का सीजन अच्छा होने की उम्मीद है।
Published on:
13 May 2018 09:37 pm
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