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VIDEO: जयकारों के साथ अरावली की वादियों में परिक्रमा पर निकली ठाकुरजी की पालकी

नीमकाथाना/उदयपुरवाटी. आस्था की प्रतिक बाबा मालकेत की चौबीस कोसीय परिक्रमा शुक्रवार को गोगानवमी से लोहार्गल से शुरू हो गई। परिक्रमा की अगुवाई करने वाली ठाकुरजी की पालकी को लेकर संत महात्माओं की टोली जयकारों के साथ परिक्रमा पर निकले।

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सीकर

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Mukesh Kumawat

Sep 09, 2023

VIDEO: जयकारों के साथ अरावली की वादियों में परिक्रमा पर निकली ठाकुरजी की पालकी

VIDEO: जयकारों के साथ अरावली की वादियों में परिक्रमा पर निकली ठाकुरजी की पालकी

नीमकाथाना/उदयपुरवाटी. आस्था की प्रतिक बाबा मालकेत की चौबीस कोसीय परिक्रमा शुक्रवार को गोगानवमी से लोहार्गल से शुरू हो गई। परिक्रमा की अगुवाई करने वाली ठाकुरजी की पालकी को लेकर संत महात्माओं की टोली जयकारों के साथ परिक्रमा पर निकले। श्रद्धालु लोहार्गल कुण्ड में डुबकी लगाकर परिक्रमा की राह चल पड़े। शुक्रवार देर शाम को परिक्रमा के लिए लोहार्गल पहुंचने वाले श्रद्धालुओं ने धर्मशालाओं में डेरा डाला, वे शनिवार सुबह परिक्रमा की शुरुआत करेंगे।

पहले दिन परिक्रमा शुरू करने वाले श्रद्धालु लोहार्गल से गोल्याना, चिराना, चिराना घाटी पार करते रात्रि में किरोड़ी धाम में अपना पहला पड़ाव डाला। परिक्रमा की अगुवाई करने वाली ठाकुरजी की पालकी को साधु संत खाकीजी के मंदिर से कुण्ड पर लेकर निकले जहां घनश्यामदास महाराज के सानिध्य में पूजा के बाद ठाकुरजी की पालकी को कुण्ड की परिक्रमा करवाई गई।

ठाकुरजी की पालकी के साथ दयालदास सीकर, भोमदास, वेदांती शिमला, मनीरामदास मुंबई, नंदाराम दास जयपुर, ओमदास खाटूश्याम, संदीपदास खंडेला, रामकिशनदास प्रयाग राजए योगी अनिल नाथ उदयपुरवाटी, वृदांवन से आनंद दासएजमुना दास, राजुदास सहित कई संत महात्मा मौजूद थे।

शनिवार को परिक्रमा दोपहर में कोट बांध पहुंचेगी जहां पालकी के साथ चल रहे संत महात्माओं का सम्मान किया जाएगा। कोट बांध के बाद ठाकुरजी की पालकी शाकंभरी में परिक्रमा के दूसरे पड़ाव पर रुकेगी।

परिक्रमा मार्ग में सात जलधाराओं से स्नान करेंगे श्रद्धालु

मालकेत बाबा की चौबीस कोसीय परिक्रमा में सात प्राकृतिक जलधारा बहती है। सबसे पहले लोहार्गल कुण्ड में बहने वाली जलधारा के पानी में स्नान करके परिक्रमा की शुरुआत करते है, जिसके बाद किरोड़ी के कुण्डों में बहने वाली गर्म व ठण्डे पानी की जलधारा में श्रद्धालु स्नान करते हैं। किरोड़ी के बाद शाकंभरी, नागकुण्ड, टपकेश्वर महादेव, शोभावती, खोरी कुण्ड में बहने वाली जलधारा में स्नान करते हुए वापस लोहार्गल पहुंचते है। लोहार्गल में अमावस्या के दिन फिर से लोहार्गल कुण्ड में गोमुख से बहने वाली पवित्र जलधारा के पानी में स्नान कर मंदिरों में पूजा अर्चना करते है तथा दान पुण्य के साथ परिक्रमा पूरी करके घरों की ओर लौटते है।

परिक्रमा के रास्तों में जगह जगह स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से शिविर लगाए गए है। शिवरों में परिक्रमा में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए चिकित्साए भोजन, पानी, चाय व विश्राम की व्यवस्था की गई है।