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छह साल की बेटी पूछती रही, पापा कहां चले गए…

सशस्त्र सीमा बल जवान ऋषि की असमायिक मौत से टूटा परिवार ब्रेन हेमरेज के कारण लखनऊ में 15 दिन से भर्ती था जवान पैतृक गांव खरबास की ढाणी में डेढ़ वर्षीय बेटे ने दी मुखाग्नि

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सीकर

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Mukesh Kumawat

Oct 09, 2022

छह साल की बेटी पूछती रही, पापा कहां चले गए...

छह साल की बेटी पूछती रही, पापा कहां चले गए...

नीमकाथाना. गांव मावंडा आरएस की खरबास की ढाणी में शनिवार को बारिश के शोर को भी एक परिवार की चीत्कार चीर रही थी। मां अपने लाल और पत्नी अपने पति और बच्चे अपने पिता के लिए बिलख रहे थे। जवान ऋषि की पार्थिव देह जैसे ही घर पहुंची तो 6 वर्षीय बेटी काव्या हर किसी से पूछती रही पापा कहां चले गए? सुबह-सुबह ही इस परिवार का लाल और एसएसबी (सशस्त्र सीमा बल) के जवान ऋषि चौधरी का शव घर पहुंचा था। लखनऊ में तैनात जवान ऋषि की 15 दिन पहले 23 सितंबर को छत्तीसगढ़ जाते समय ट्रेन में तबीयत खराब हो गई थी। इस दौरान जवान को ब्रेन हेमरेज हो गया। आनन फानन में जवान को लखनऊ के अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां शुक्रवार को अस्पताल में जवान ने अंतिम सांस ली। जानकारी के अनुसार सुबह पहुंची जवान की पार्थिव देह को सुरक्षा गार्ड के साथ चतुर्थ वाहिनी सशत्र सीमा बल लखनऊ से सरकारी वाहन में गांव की सीमा से तिरंगा यात्रा के साथ ढाणी खरबास लाई गई, तो घर पर कोहराम मच गया। पत्नी मंजू व मां का रो-रोकर बुरा हाल था। पूर्व सरपंच पिता बिहारीलाल बेटे के शव को टकटकी लगाए देखते रहे। घर से एक किलोमीटर पहाड़ी पर स्थित श्मशान घाट में ग्रामीणों ने नम आंखों के बीच भारत माता के जयकारों के साथ लाडले को अंतिम विदाई दी। तिरंगे में लिपटा कर लाए जवान को एसएसबी के अधिकारी ने उनके बेटे मोहित को तिरंगा सौंपा । राजकीय सम्मान के साथ जवान का अंतिम संस्कार कर दिया गया। जवान को उसके डेढ़ वर्षीय पुत्र मोहित ने चिता को मुखाग्नि दी। चतुर्थ वाहिनी सशस्त्र सीमा बल के जवानों की ओर से दिवंगत ऋषि को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। इस दौरान पूर्व विधायक प्रेम सिंह बाजोर, महावीर चक्र विजेता दिगेंद्र कुमार, उपखंड अधिकारी बृजेश कुमार, सदर थानाधिकारी भंवरलाल कुमावत, पूर्व प्रधान संतोष गुर्जर, महेन्द्र मांडिया, सरपंच विनोद जाखड़, सरपंच सुरेश खेरवा व बलवीर खेरवा सहित ग्रामीणों ने जवान की पार्थिव देह पर पुष्पचक्र अर्पित किए।

मौत की खबर सुनते ही पत्नी बेसुध

पत्नी मंजू को अलसुबह जैसे ही पति के शव की आने की सूचना लगी तो वह बेसुध हो गई। परिवार के लोग उसको तुरंत अस्पताल में भर्ती करवाया। पार्थिव देह घर लाने के बाद पत्नी को अस्पताल से घर लगाया गया तथा पति के अंतिम दर्शन करवाए।

परिवार पर टूट गया दुखों का पहाड़

वॉलीबॉल प्रतियोगिता में दो बार नेशनल व दो बार स्टटे खेल चुके ऋषि खेल कोटे से ही वर्ष 2011 में एसएसबी में भर्ती हुए थे। वह सबसे मिलनसार व हंसमुख स्वबाव के थे। जब भी गांव आते सबसे मिलकर आते। वह एक डेढ़ माह पहले ही गांव आकर गए थे।


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