
दुर्गा सप्तशती में है महामारी से बचाव का मंत्र
शेखावाटी के संत बोले-घर में करें शक्ति की आराधना
सीकर. मां दुर्गा की आराधना के दिन चेत्र नवरात्र बुधवार से शुरू होंगे। घरों में कलश स्थापना कर मां की आराधना की जाएगी, लेकिन शेखावाटी समेत देश के मुख्य शक्ति पीठों पर इस बार नवरात्र में मंत्र खामोश रहेंगे। वजह है महामारी का प्रकोप। सरकार की ओर से जारी एडवाइजरी के आधार पर इन मंदिरों में श्रद्धालुओं के लिए दर्शन पर पाबंदी लगा दी गई। ऐसे में वहां पर दुर्गा सप्तशती के पाठ और शतचंडी यज्ञ भी नहीं होंगे। इस बीच पत्रिका ने क्षेत्र के संतों की राय ली तो सामने आया कि महामारी के प्रकोप से बचने के लिए जनता घर में रहकर शक्ति की आराधना करें और सरकार भी सरकार भी धार्मिक और वैज्ञानिक मान्यताओं को ध्यान में रखकर वायरस के संक्रमण को रोकने का प्रयास करें।
दुर्गा सप्तशती में है महामारी विनास का मंत्र
नवरात्र में दुर्गा सप्तशती का पाठ करने का विधान है। खास बात है कि दुर्गा सप्तशती में महामारी से विकास का मंत्र है। मंत्र...जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालनी...तथा उपसर्गानशेषास्तु महामारीसमुदृभवान...का जाप महामारी को रोकने के लिए किया जाता है। धार्मिक के साथ वैज्ञानिक भी मानते हैं कि हवन से वायुमंडल शुद्ध होता है।
हर नवरात्र में होते हैं दर्जनों यज्ञ
शेखावाटी अंचल की स्थिति देखे तो यहां शाकम्भरी और जीणमाता दो बड़े शक्ति पीठ हैं। दोनों ही स्थलों पर हर नवरात्र में दर्जनों की संख्या में शतचंडी यज्ञ होते हैं। दुर्गासप्तशती के सामूहिक पाठ और हवन होते हैं। इसके साथ ही नवरात्र में श्रद्धालुओं की भीड़ रहती है। जीणमाता का तो मेला भी भरता है। लेकिन इस बार सरकार की ओर से जारी एडवायजरी के आधार पर मंदिर में ३१ मार्च तक के लिए श्रद्धालुओं के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।
पहली बार बंद हुए हैं मंदिर
शेखावाटी के बुजुर्गों का कहना है कि महामारी के प्रकोप के चलते पहली बार शेखावाटी के धर्मस्थल बंद हुए हैं। वर्ष 1918 में देश में पहली बार फ्लेग की महामारी फैली थी। उस दौरान शाकंभरी माता के दर्शन बंद नहीं हुए थे। इसके बाद अभी कोराना महामारी के रूप में आया है।
इनका कहना है...
दुर्गासप्तशती में महामारी रोकने के लिए मंत्र है। मंत्र और यज्ञ की ताकत को विज्ञान ने भी माना है। पुरातन काल से सरकारें धार्मिक आस्था रखती आई है। भैरोंिसह शेखावत और वसुंधरा राजे की सरकार के समय शतचंडी यज्ञ करवाए जाते थे। इस बार मंदिरों में आयोजन नहीं हो रहे। ऐसे में कोरोना के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए सरकार को ऐसे अनुष्ठान करवाने चाहिए।
स्वामी राधवाचार्य, अग्रपीठाधीश्वर रैवासा धाम
सब मिलकर हराए कोरोना को कोरोना के संक्रमण के चलते लोगा घरों में है। आज आवश्यकता है कि सब मिलकर कोरोना को हराए। जनता घरों में रहकर शक्ति की आराधना करें। मंत्रों का जाप और यज्ञ करे। शक्ति की आराधना महामारी का प्रकोप रोकेगी। सरकार को भी इस तरफ ध्यान देना चाहिए।
महंत दिनेश गिरी बुधगिरी की मढी फतेहपुर शेखावाटी
नवसंवत्सर पर पूजा का विधान प्रकृति के प्रति कृतघ्नता दर्शाता है। मानव जीवन के उत्थान के लिए ही शक्ति की पूजा-अर्चना की जाती है। वर्तमान हालत का कारण भी कृतघ्नता में कमी को दर्शाता है। सब मिलकर घरों में शक्ति की आराधना करें। भीड़भाड़ से बचे।
महंत अशोकदास महाराज, श्री रघुनाथजी बड़ा मंदिर, लक्ष्मणगढ़
कोरोना महामारी से बचने के लिए लोगों को घरों में रहना होगा। कोरोना को हराने के लिए घर में रहकर ही शक्ति की आराधना करनी चाहिए।
पवन पुजारी, महंत, रूपाणा धाम, भीमसर
Published on:
24 Mar 2020 11:43 pm
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