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…तो फिर इन वादियों में नहीं गूंजेगी दहाड़!

नींद में विभाग: हर वर्ष नीमकाथाना वन्य क्षेत्र में एक से दो पैंथरों की हो रही है मौत पांच दिन पहले जीलो की पहाड़ी पर भी मिला था पैंथर का शव सरकार पैंथरों का नहीं कर पा रही सरंक्षण

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सीकर

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Suresh Sharma

Mar 14, 2020

...तो फिर इन वादियों में नहीं गूंजेगी दहाड़!

...तो फिर इन वादियों में नहीं गूंजेगी दहाड़!

नीमकाथाना. जिले के सबसे बड़े वनक्षेत्र नीमकाथाना में पैंथरों के सरंक्षण को लेकर सरकार की तरफ से किए जाने वाले दावे फेल होते नजर आ रहे हैं। इलाके में एक से दो पैंथर हर वर्ष मौत के शिकार बन रहे हैं। वर्ष 2019 वन्य जीव गणना के अनुसार क्षेत्र में केवल तीन ही पैंथर विचरण कर रहे हैं। जबकि वर्ष 2016 से 2020 में अब तक 14 से ज्यादा पैंथरों के शव विभिन्न स्थानों पर मिल चुके हैं। ग्र्रामीणों व गुवालों का दावा है कि क्षेत्र में करीब 1 दर्जन से ज्यादा पैंथर वर्तमान में मौजूद है। दिनों दिन मर रहे पैंथरों की मौत की जांच पड़ताल वन विभाग आज तक नहीं कर पाया है।
नीमकथाना रेंज में 18435.70 हैक्टेयर व पाटन रेंज में करीब 13268 हैक्टेयर में फैले वन्य क्षेत्र में लगातार हो रही पैंथर की मौत पर विभाग की घोर लापरवाही वन्य जीवों के लिए संकट बन रही है। अगर वन विभाग जल्द ही इस ओर कोई उचित कदम नहीं उठाया तो आने वाले समय में वन क्षेत्र में पैंथर दिखाई देना तो दूर की बात लोगों को दहाड़ तक सुनाई नहीं देगी।
राज्य व केन्द्र सरकार की तरफ से वन्य क्षेत्रों में विचरण कर रहे वन्यजीवों के सरंक्षण को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। मगर कई कारणों के चलते वन्य क्षेत्र में विचरण कर रहे पैंथरों अस्तित्व पर हर समय संकट बना रहता है। स्थानीय वन विभाग के अधिकारी वन्य जीवों के सरंक्षण को लेकर पूरे प्रयास लगाते है।
लेकिन संसाधनों की कमी के चलते उनके कयास विफल हो जाते है। नतीजा ये रहता है कि हर वर्ष पैंथरों की किसी न किसी कारणों से मौत हो जाती है।
01. उपचार नहीं मिलने से हुई मौत
नवंबर 2016 में श्रीमाधोपुर के रलावता गांव में युवती पर हमला करने के बाद घर में छुपे पैंथर को वन विभाग की टीम ने बालेश्वर के जंगल में छोड़ दिया था। दो दिन बाद अधिकारियों की लापरवाही के करण पैंथर ने दम तोड़ दिया था। हालांकि विभाग के अधिकारी पैंथर की मौत का कारण दो पैंथरों की आपसी लड़ाई होने से माना। जबकि घायल मिला पैंथर को समय पर उपचार मिल जाता तो शायद उस समय उसकी जान बच सकती थी।
02.पहाड़ी क्षेत्र में मृत मिला था पैंथर
मार्च 2016 में गांव सालावाली में स्थित कृषि फार्म के पास पहाड़ी क्षेत्र मेंं पैंथर का शव मिला था। उस दरमीयान मौके पर पैंथर के बाल काफी दूर तक फेले होने से अधिकारियों ने दो पैंथर आपस में झगडऩे के दौरान पहाड़ी से पैंथर नीचे फिसले से मौत का कारण बताया।
03. बीमार पैंथर ने तोड़ा था दम
मई 2019 में इलाके गांव बालेश्वर के ढाबाला में खान पर प्यास के चलते घायल पैंथर ने दम तोड़ा था। उस दौरान स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों ने पैंथर को बचाने की कोशिश में उसे पानी व खाने के मुर्गी डालकर उच्च अधिकारियों को घायल पैंथर की सूचना दी। बावजूद जयपुर से चिकित्सा टीम समय से मौके पर नहीं पहुंच पाने के कारण पैंथर को उपचार में देरी मिलने से उसे मौत के घाट उतरना पड़ा।
04. नहीं पता चला...
नवंबर 2019 में बालेश्वर के पास स्थित घुरसली के जंगल में शाम को मादा पैंथर का शव मिला था। अधिकारियों को उस दौरान पैंथर की मौत का कारण नहीं पता चल पाया था।
05. भूख से मौत
मार्च 2020 में जीलो की पहाड़ी पर पैंथर का शव मिला था। पीएम में चिकित्सकों ने भूख लगना व बरसात के दौरान हुई ओलावृष्टि से पैंथर की मौत का कारण बताया गया। इस इलाके में कई बार मृत पैंथरों के शव मिल चुके हैं।