
सियासत का पलटु खेल: राजस्थान में सरकार बदलते ही बंद हो गई ये योजनाएं
प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ योजनाओं के नाम बदलने की सियासत का रिवाज इस बार भी कायम है। भाजपा सरकार की ओर से कुछ दिन पहले महात्मा गांधी सेवा प्रेरक भर्ती को निरस्त कर दिया था। वहीं राजीव गांधी युवा मित्र इंटर्नशिप कार्यक्रम को भी समाप्त कर दिया है। सरकार के इन दो आदेशों के बाद पूर्व सीएम अशोक गहलोत व पीसीसी अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने प्रतिक्रिया दी कि भाजपा को योजना के नाम से आपत्ति थी तो नाम बदल लेते, लेकिन बेरोजगारों के साथ अन्नाय नहीं करना चाहिए। इधर, गरीब परिवारों को सिलेण्डर देने की योजना के नाम पर भी सियासत शुरू हो गई है। पिछले 20 साल में सत्ता परिवर्तन का रेकॉर्ड देखे तो हर सरकार में योजनाओं के नाम बदलने की सियासत जारी रही।
अब इन योजनाओं में नाम बदलने की तैयारी
1. इंदिरा गांधी रसोई
पिछली भाजपा सरकार के समय इस योजना का नाम अन्नपूर्णा रसोई था। कांग्रेस में सत्ता में आते ही इंदिरा गांधी रसोई नाम कर दिया। अब भाजपा सरकार की ओर से योजना में कुछ परिवर्तन के साथ नाम बदलने की चर्चाएं हैं।
2. शिक्षा योजनाएं:
गहलोत सरकार ने स्कूल व कॉलेज शिक्षा छात्रवृत्ति योजनाएं राजीव और इंदिरा गांधी के नाम पर कर दी। वसुंधरा राज में यह योजनाएं पंडित दीनदयाल उपाध्याय व अटल बिहारी के नाम पर संचालित थी। इन्हें फिर से बदलने की चर्चाएं है।
3. सेवा केन्द्र
भाजपा ने पिछली बार सत्ता में आने पर ग्राम पंचायत स्तर पर बने राजीव गांधी सेवा केन्द्रों का नाम बदलकर अटल सेवा केन्द्र कर दिया था। कांग्रेस ने काफी विरोध किया। सत्ता में आते ही कांग्रेस ने भी नाम बदल दिया और फिर से राजीव गांधी सेवा केन्द्र कर दिया। अब भाजपा सरकार इन सेवा केन्द्रों का नाम बदलने की फिर से तैयारी कर रही है।
4. भामाशाह/जनआधार
वसुंधरा सरकार ने महिलाओं के लिए भामाशाह कार्ड बनवाए। इन कार्ड पर तत्कालीन मुख्यमंत्री की फोटो लगाने से कांग्रेस ने काफी हंगामा किया। कांग्रेस ने सत्ता में आने के बाद इन कार्ड का नाम बदलकर जन-आधार कार्ड कर दिया।
5. साइकिल पर भी सियासी रंग
स्कूली विद्यार्थियों को मिलने वाली साइकिल पर सियासी रंग चढ़ा रहा। कांग्रेस ने विपक्ष में रहते हुए साइकिल का रंग भगवा बताकर विरोध किया था। सत्ता में आते ही रंग बदल दिया। अब साइकिल व लेपटॉप वितरण की योजनाएं बदलने की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। कांग्रेस सरकार की ओर से सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों को दी जाने निशुल्क ड्रेस के कपड़े के कवर पर तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत की फोटो लगी होने के कारण अब नई सरकार के राज में फोटो पर स्टीकर लगाकर ड्रेस बांटी जा रही हैं।
नाम बदलने में 25 करोड़ खर्च
रोचक बात यह है कि पंचायत सेवा केन्द्रों से लेकर लैटर पेड बदलने से दस साल में 25 करोड़ से अधिक का खर्चा हुआ है। सबसे ज्यादा खर्चा पंचायत सेवा केन्द्रों की रंगाई-पुताई में लगभग 15 करोड़ से अधिक का खर्चा हो चुका है।
एक्सपर्ट व्यू....
सरकारी योजनाएं महापुरुषों के नाम पर रखने की परम्परा शुरू होनी चाहिए। इससे सत्ता बदलने पर नाम की सियासत अपने आप खत्म हो जाएगी। नाम बदलने में ही बहुत पैसा लगता है इसकी कीमत जनता चुकाती है।
- धर्मेन्द्र शर्मा, सामाजिक कार्यकर्ता, सीकर
रोजगार का रोडमैप बनाने के बजाय लोकहित की योजनाएं बंद कर भाजपा ने रोजगार छीनने का काम शुरू कर दिया है। भाजपा ने 50 हजार महात्मा गांधी प्रेरकों की भर्ती रद्द कर युवाओं के भविष्य पर कुठाराघात किया है। नाम बदलना है तो नाम बदलते, नौजवानों की रोजी-रोटी छीनने का मजाक क्यों किया गया।
गोविन्द सिंह डोटासरा, अध्यक्ष, प्रदेश कांग्रेस कमेटी
Published on:
06 Jan 2024 01:26 pm
