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सीकर का ढ़ाई साल से अटका है मास्टर प्लान, दोनों दलों की तरफ से सियासत, जनता की राहत दूर

नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा विधानसभा से लेकर कई कार्यक्रमों में सीकर मास्टर प्लान को लेकर घोषणा कर चुके है। इसके बाद भी मास्टर प्लान को हरी झंडी नहीं दी जा रही। जनता को कब मिलेगी राहत?
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सीकर

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Santosh Trivedi

Jul 13, 2026

Sikar Bypass News

Sikar City. फोटो: पत्रिका

सीकर। अटके मास्टर प्लान की वजह से शिक्षानगरी सीकर में अवैध कॉलोनियों की संख्या लगतार बढ़ रही है। इसके बाद भी सरकार की ओर से मास्टर प्लान को हरी झंडी नहीं दी जा रही है। मास्टर प्लान के अटकने की वजह से शिक्षानगरी में अनियोजित बसावट भी बढ़ रही है। खास बात यह है कि पहले तो शहर के बाईपास इलाके में भी अवैध कॉलोनियों की संख्या बढ़ रही थी। अब यूआइटी क्षेत्र में शामिल नए क्षेत्रों में भी अवैध कॉलोनियों की संख्या कई गुणा बढ़ गई है। इसके बाद भी अवैध कॉलोनियों पर शिकंजा कसने की कोई तैयारी नहीं है।

शहरों के सुनियोजित विकास के दावों के बीच बड़ा विरोधाभास सामने आ रहा है। प्रदेश के नवगठित 49 शहरों के लिए तैयार किए जाने वाले मास्टर प्लान में सेक्टर और जोन स्तर की माइक्रो प्लानिंग शामिल नहीं होगी। यानि, शहरों के वार्डवार विकास, स्थानीय जरूरतों और बुनियादी सुविधाओं की विस्तृत योजना फिर अधूरी रह जाएगी। सार्वजनिक सुविधाओं, पार्क, स्कूल, स्वास्थ्य सेवाओं और भविष्य के विस्तार जैसी बारीक योजना फिर नहीं बन पाएगी। यह स्थिति न केवल भविष्य के अव्यवस्थित शहरी विस्तार की आशंका बढ़ाएगी, बल्कि हाईकोर्ट की उस मंशा के भी विपरीत है, जिसमें सुनियोजित शहरी नियोजन के आदेश दिए गए थे।

यूडीएच मंत्री कई बार कर चुके दावा

नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा विधानसभा से लेकर कई कार्यक्रमों में सीकर मास्टर प्लान को लेकर घोषणा कर चुके है। मंत्री ने पहले दावा किया था कि मास्टर प्लान की समीक्षा के बाद जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद मास्टर प्लान तो जारी हुआ लेकिन विवादों के बाद अटक गया। दूसरी तरफ मंत्री ने अनुदान मांगों के जवाब में कह चुके हैं कि प्रदेश के शहरों में अब मास्टर प्लान के साथ-साथ सेक्टर प्लान और जोनल प्लान भी बनाए जाएंगे। ताकि, शहरी विकास योजनाएं तय समय पर जमीन पर उतर सकें और अव्यवस्थित विस्तार पर प्रभावी रोक लग सके।

पुरानी व्यवस्था पर नई सरकार

पिछली कांग्रेस सरकार के समय एक लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए जोनल प्लान की अनिवार्यता समाप्त कर इसे वैकल्पिक किया था। हालांकि इसके बाद किसी भी नगर निकाय का जोनल प्लान तैयार नहीं हुआ। अब मौजूदा भाजपा सरकार भी उसी व्यवस्था पर आगे बढ़ रही है। रोचक बात यह है कि कांग्रेस सरकार के समय भाजपा के विधायकों और अन्य नेताओं ने इस फैसले का विरोध किया था, लेकिन सत्ता में आने के बाद अब तक इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया।

इस तरह समझें : मूलभूत सुविधाओं का खाका है जोनल प्लान

  • मास्टर प्लान : शहर के विकास का पॉलिसी दस्तावेज है। इसमें पूरे शहर का विकास का वृहद प्लान शामिल है। मसलन, शहर के किस इलाके में भूउपयोग आवासीय, संस्थानिक, कॉमर्शियल होगा। रोड नेटवर्क से लेकर परिवहन, मनोरंजन, आवास से जुड़ा खाका खींचा जाता है। इसमें इलाकेवार विकास का प्लान नहीं होता।
  • जोनल डवलपमेंट प्लान : भूमि के उपयोग के लिए जोनवार (इलाकेवार) विकास का खाका तैयार होता है। शहर को अलग-अलग जोन में बांटते हैं और हर जोन की अलग से डवलपमेंट योजना बनाई जाती है। इसमें आवास, सार्वजनिक भवन, जनसुविधा केन्द्र, सड़क, मनोरंजन केन्द्र, पार्क, उद्योग, व्यवसाय, बाजार व स्कूल आदि के लिए जगह चिह्नित करते हैं। इसके अलावा बिजली, पानी, अंदरुनी सड़कों जैसी मूलभूत सुविधाओंं से जुड़ी प्लानिंग भी इसी का हिस्सा है। डवलपमेंट फंड कैसे और कहां से आएगा, इसका भी होमवर्क होता है।

यह हाे रहा नुकसान

जोनल प्लान नहीं बनने से शहर में बेतरतीब तरीके से बसावट होने की आशंका बनी हुई है। ज्यादातर निकायों में अभी यह हालात हैं। जमीनी स्तर पर होने वाली प्लानिंग नहीं हो रही। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट से अनुमति मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया था। इसके बाद एक्ट में संशोधन करना पड़ा।