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मिसाल: चारा देने पर आने लगी गायें तो किन्नर ने घर में ही खोल ली गौशाला, 50 गायों की करती है सेवा

रणजीत सिंह शेखावतसीकर/पलसाना. राजस्थान के सीकर जिले के पलसाना कस्ब में एक किन्नर गोसेवा की अनूठी मिसाल पेश कर रही है। कस्बे के जुराठड़ा रोड स्थित कॉलोनी में रहने वाली किन्नर मुन्नी में गौसेवा की ऐसी भावना है कि वह घर पर ही पचास गायों की गौशाला संचालित कर रही है।

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सीकर

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Sachin Mathur

Apr 02, 2021

मिसाल: चारा देने पर आने लगी गायें तो किन्नर ने घर में ही खोल ली गौशाला, 50 गायों की करती है सेवा

मिसाल: चारा देने पर आने लगी गायें तो किन्नर ने घर में ही खोल ली गौशाला, 50 गायों की करती है सेवा

सीकर/पलसाना. राजस्थान के सीकर जिले के पलसाना कस्ब में एक किन्नर गोसेवा की अनूठी मिसाल पेश कर रही है। कस्बे के जुराठड़ा रोड स्थित कॉलोनी में रहने वाली किन्नर मुन्नी में गौसेवा की ऐसी भावना है कि वह घर पर ही पचास गायों की गौशाला संचालित कर रही है। वह खुद सुबह से शाम तक काम इसमें काम करती है वहीं गायों की सार संभाल करने के लिए अपनी साथिनों के साथ ही मेहनताने पर मजदूर भी रखती है। मुन्नी ने बताया कि उसे काम से बाहर भी जाना पड़ता है। ऐसे में गायों की सार संभाल के लिए मजदूर भी रखने पड़ रहे है। लेकिन वो घर पर रहती है तब खुद भी दिनभर गायों की सेवा में लगी रहती है।

धीरे धीरे बढ़ गया गायों का कुनबा
मुन्नी ने बताया कि उसे बचपन से ही गोसेवा की धुन है। गायों की सेवा करने से उसे सुकून मिलता है। वह छोटी थी तब से ही गाय पालने का शौक रहा है। इसके बाद वो जब बाजौर में रहने लगी तब दो गाय रखती थी। इसके बाद चार साल पहले पलसाना में मकान बनाकर रहने लगी तो गायों को पलसाना ले आई। यहां कुछ आवारा गायों को ओर रख लिया। बाद में उसने आसपास बीमार और छोटी बछडिय़ों को चारे के लिए इधर उधर भटकते देखा तो उनको भी अपने घर के बाहर चारा पानी डालने लगी। गायों को चारा मिलने लगा तो गायों ने घर के आसपास ही डेरा डाल दिया और सुबह शाम चारे के लिए घर के बाहर आकर खड़ी हो जाती। जिससे बाद में उसने उनके लिए नियमित चारे पानी की व्यवस्था शुरू कर दी। ऐसे में धीरे धीरे गायों का कुनबा बढ़ता गया और आज करीब पचास छोटी बड़ी गायों की सेवा कर उनके लिए चारे पानी की व्यवस्था कर रही है। फिलहाल दस पन्द्रह गायों के लिए ही छाया की व्यवस्था है। ऐसे में बाकी गायों को घर के पास ही खाली पड़े एक खेत में पेड़ों के नीचे बांध कर रखती है और वहीं पर उनके लिए चारे पानी की व्यवस्था करती है।

चारे के लिए खेती भी की
घर पर गायों को रखने के बाद गायों की संख्या बढ़ी तो चारे की व्यवस्था करना भी जिम्मेदारी बन गई। ऐसे में चारा खरीदने के साथ ही मुन्नी ने पलसाना में ही बरसात के दिनों में करीब पचास बीघा दूसरे का खेत बटाई पर लेकर मजदूरों से खेती करवाई और गायों के लिए चारे की व्यवस्था की। ऐसे में अब फिलहाल जितनी गाए है उन गायों के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था हो गई है।

गांव की गोशाला के संचालन की भी जता चुकी है मंशा
किन्नर मुन्नी बाजारों में आवारा भटकते गोवंश को देखकर उनकी सेवा करने की मंशा भी रखती है। लेकिन उसके पास अभी जगह की कमी है। इसके लिए वो अपने स्तर पर ही गोशाला बनाने के लिए जमीन की तलाश में है। मुन्नी ने भदाला की ढाणी में संचालित गोशाला को भी अपने स्तर पर संचालित करने की मंशा जताई है। इसको लेकर पिछले दिनों वो गोपाल मंदिर के महंत मनोहर शरण शास्त्री