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इस तरह गुजरी रमजान उल मुबारक की 27 वीं रात

माहे रमजान की 27 वीं रात पर लोगों ने पूरी रात इबादत करके अपने गुनाहों की माफी मांगी। इस दौरान पूरी रात लोग मस्जिद व घरों में इबादत में लगे रहे।

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इस तरह गुजरी रमजान उल मुबारक की 27 वीं रात

सीकर.

माहे रमजान की 27 वीं रात पर लोगों ने पूरी रात इबादत करके अपने गुनाहों की माफी मांगी। इस दौरान पूरी रात लोग मस्जिद व घरों में इबादत में लगे रहे। इसके चलते शहर में रातभर मेले का सा माहौल रहा। हालांकि शबे कद्र की रात आखिरी अशरे में पांच ताक (विषम) रातों में से एक मानी जाती है, लेकिन ज्यादातर लोगों ने 27 वीं रात को जागकर इबादत की। इसके चलते शहर में पूरी रात रौनक रही और लोगों में इसको लेकर काफी उत्साह नजर आया। बच्चों में भी शबे कद्र को लेकर काफी जोश था और पूरी रात मस्जिद व घरों में चहल पहल रही। शबे कद्र को लेकर शहर में मस्जिदों में रोशनी व साफ सफाई कर काफी इंतजाम किए गए थे। लोगों ने रात को नफ्ली नमाज पढी व कुरान की तिलावत कर इबादत की। इससे रातभर शहर में रौनक रही। सुबह सेहरी करके फर्ज की नमाज अदा की गई।
बाजारों में बढ़ी भीड़
रमजान का महीना पूरा होने में तीन दिन रहने से लोगों में ईद के प्रति उत्साह है। लोगों ने ईद की तैयारियां तेज कर दी है। इससेे बाजारों में लोगों खासकर महिलाओं की भीड़ बढऩे लगी है। इसके चलते देर शाम तक बाजारों में रौनक रहने लगी है।
क्या है शबे कद्र
शबे कद्र को लैयल तुल कद्र भी कहा जाता है। इस रात को हजार महीनों की रात से बेहतर माना गया है। मौलाना यूनुस कासमी बताते हैं कि हदीसों में शबे कद्र को रमजान के आखिरी अशरे में पांच ताक रातों (21वीं, 23, 25, 27 व 29 वीं) में से किसी एक को बताया गया है। कुरान व हदीसों में आता है कि इस रात को कुरान उतारा गया था। इस रात में जागकर इबादत करने और अपने गुनाहों की माफी मांगने से अल्लाह बंदों के पिछले सारों गुनाह माफ कर देता है।


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