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सावधान ! अगर आप भी टिफिन सेंटर का खाना खा रहे हैं तो खतर में है आपकी जान

शहर या जिले में रह रहे लोग यदि टिफिन सेंटर का खाना खा रहे हैं तो सावधान हो जाइए। ये आपको खाने के साथ बीमारी भी परोस सकते हैं।

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शहर या जिले में रह रहे लोग यदि टिफिन सेंटर का खाना खा रहे हैं तो सावधान हो जाइए। ये आपको खाने के साथ बीमारी भी परोस सकते हैं।

सावधान ! अगर आप भी टिफिन सेंटर का खाना खा रहे हैं तो खतर में है आपकी जान

सीकर.

शहर या जिले में रह रहे लोग यदि टिफिन सेंटर का खाना खा रहे हैं तो सावधान हो जाइए। ये आपको खाने के साथ बीमारी भी परोस सकते हैं। वजह जिले मे एक भी टिफिन सेंटर ऐसा नहीं है जो स्वास्थ्य विभाग के मानक पूरे करता हो। इसकी बानगी है कि जिले में साढ़े तीन सौ से ज्यादा टिफिन सेंटर चल रहे हैं लेकिन अधिकांश का पंजीकरण नहीं है। सरकार के किसी नियम के अधीन नहीं आने से ये टिफिन सेंटर बिना किसी मानक के धडल्ले से चल रहे हैं। कमोबेश यही स्थिति होटल व रेस्त्राओं की है। आश्चर्य की बात ये है कि हजारों की आबादी की रोजमर्रा की जरूरत होने के बावजूद जिम्मेदारों का इस ओर ध्यान तक नहीं जा रहा है। खास बात है कि खाद्य विभाग ने पिछले चार वर्ष के दौरान एक भी टिफिन सेंटर पर बड़ी कार्रवाई नहीं की।


ऐसे करते हैं गडबड़ी
शहर में हजारों विद्यार्थी अध्ययन करने के लिए रहते होस्टलों में है लेकिन खाना टिफिन सेंटर या मैस से मंगवाते हैं। हकीकत ये है कि 90 फीसदी टिफिन सेंटर या मैस में आटा, सब्जियां, तेल व अन्य खाद्य सामग्री खुले में मच्छरों व गंदगीयुक्त बॉक्स में पड़ी रहती है। नाम नहीं छापने की शर्त पर कई टिफिन संचालकों ने बताया कि टिफिन सेंटर कोई भी खोल सकता है लेकिन विभाग की ओर से डिमांड करने पर बिना शुल्क लिए सेवाएं देनी ही पड़ती है। सीकर कृषि उपज मंडी के थोक व्यापारियों ने बताया कि कई टिफिन सेंटरों पर तो अवधि पार आटा काम में लेते हैं। शाम के समय मंडी में बिना बिकी हुई सब्जी खरीदते हैं। खास बात है कि व्यवसायिक गतिविधि होने के बावजूद कई सेंटर संचालक घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों से ही खाना बनाकर बेचते हैं।


होना ये चाहिए
खाद्य विभाग के अनुसार खाना बेचने के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है। टिफिन सेंटर या मैस में खाना बनाने व बर्तन धोने के लिए हाइजीनिक स्थिति का ध्यान रखा जाना चाहिए। खाना बनाने वाले को किसी प्रकार की बीमारी तो नहीं है इसके लिए उसका नियमित रूप से मेडिकल करवाना चाहिए। खाने के बर्तन को गर्म पानी से धोना चाहिए जिससे खाने के बाद बर्तन के कीटाणु या जीवाणु पूरी तरह नष्ट हो जाए।


इनका कहना है
जिले में कई रेस्टोरेंट, हॉस्टल में संचालित टिफिन सेंटर पंजीकृत नहीं है। खाद्य विभाग के दायरे में नहीं आने से टिफिन सेंटर की जांच नहीं हो पाती है।हालांकि पहले तीन सेंटरों से नमूनें लिए गए थे। जिनमें न्यायालय में वाद दायर किए गए हैं। -रतन गोदारा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी