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Valentine’s day Special: राजस्थान में यहां प्रेमिका की याद में युवराज ने बनवाया था प्रकाश स्तंभ

सीकर जिले का राजशाही इतिहास रियासती मुकाबलों के साथ मोहब्बत की मिठास से भी जुड़ा है। जिसमें प्रेम की निशानी के रूप में दर्ज एक स्तंभ 80 साल से उसके पन्नों को प्रकाशित कर रहा है।

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सीकर

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Sachin Mathur

Feb 14, 2024

Valentine's day Special: राजस्थान में यहां प्रेमिका की याद में युवराज ने बनवाया था ये प्रकाश स्तंभ

Valentine's day Special: राजस्थान में यहां प्रेमिका की याद में युवराज ने बनवाया था ये प्रकाश स्तंभ

सीकर जिले का राजशाही इतिहास रियासती मुकाबलों के साथ मोहब्बत की मिठास से भी जुड़ा है। जिसमें प्रेम की निशानी के रूप में दर्ज एक स्तंभ 80 साल से उसके पन्नों को प्रकाशित कर रहा है। ये स्तंभ सीकर के अंतिम शासक राव राजा कल्याण सिंह के बेटे युवराज हरदयाल सिंह व उनकी पत्नी आद्या देवी के प्रेम का गवाह है। जिसे वेलेंटाइन डे के दिन 14 फरवरी को ही लगाया गया था।

घूमने के दौरान हुई मुलाकात
1921 में जन्में हरदयाल सिंह अजमेर की मेयो कॉलेज में पढ़े थे। युवराज घोषित होने के बाद वह नीलगिरी, मसूरी व देहरादून घूमने गए थे। जहां उनकी मुलाकात नेपाल के मंत्री राणा जंग बहादुर की बेटी आद्या कुमारी से हुई। दोनों के बीच प्रेम प्रसंग शुरू होने के बाद 8 फरवरी 1942 में लखनउ के चंद्र भवन में दोनों की शादी हुई। लेकिन, आद्या कुमारी से युवराज का साथ दो साल ही रहा। बेहद धार्मिक आद्याकुमारी का 1944 में देहांत हो गया। जिनका मौजूदा दीवान मार्केट स्थित राजघराने के शमशान में अंतिम संस्कार हुआ। इतिहासकार महावीर पुरोहित बताते हैं कि युवरानी की मौत पर युवराज हरदयाल काफी टूट गए और वह उनकी समाधि पर ही लंबा समय बिताने लगे। शाम को अंधेरा होने पर वह उन्हें खटकने लगता तो उन्होंने वहां प्रकाश स्तंभ लगवा दिया। बकौल पुरोहित यूरोपियन कल्चर में पढ़े- बढ़े युवराज ने यह पीलर वेलेंटाइन डे के दिन ही लगाया था। जो आज भी उनके प्रेम का प्रतीक बना हुआ है। उन्ही आद्याकुमारी के नाम पर राव राजा कल्याण सिंह ने स्टेशन रोड पर गुलाबचंद सागरमल सोमाणी के सौजन्य से जनाना अस्पताल का निर्माण कराया था।

माता- पिता के पैर छूना सिखाया
इतिहासकारों के मुताबिक आद्याकुमारी आध्यात्मिक महिला थी। उन्हें सीकर की मीरा बाई कहा जाने लगा था। उन्होंने युवराज की शराब पीने की आदत छुड़वा कर डेली सुबह माता पिता के पैर छूने की आदत डलवाई थी। उनकी मौत के बाद युवराज की दूसरी शादी नेपाल सम्राट त्रिभुवन की बेटी त्रैलोक्य राजलक्ष्मी से 25 फरवरी 1948 में काठमांडु में हुई थी।