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शर्मनाक : ये युवक 15 हजार रुपए में करते थे बेटी का सौदा

-खूड़ी कारंगा के बीच ढाबे पर कर रहे सोनोग्राफी, पीसीपीएनडी ने किए दो दलाल गिरफ्तार, फॉच्र्यूनर गाड़ी जब्त, पिछले दो साल में 140 से ज्यादा कराए गर्भपात

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सीकर. कन्या भ्रूण हत्या को रोकने के लिए राज्य सरकार की ओर से अब तक 96 डिकॉय ऑपरेशन किए जा चुके हैं लेकिन हकीकत यह है कि जिला मुख्यालय के पास फतेहपुर कस्बे में पिछले दो साल से लग्जरी गाड़ी में पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन के जरिए भ्रूण परीक्षण को खुले आम हाईवे पर अंजाम दिया जा रहा था। राज्य पीसीपीएनडीटी की टीम ने डिकॉय ऑपरेशन कर भ्रूण जांच करते दो दलालों को रंगे हाथ गिरफ्तार किया।

पिछले तीन दिन से क्षेत्र में सक्रिय टीम ने मंगलवार देर रात गिरोह का पर्दाफाश करते हुए फतेहपुर शेखावाटी तहसील के गांव सदीनसर निवासी दिपेन्द्र पुत्र गंगाधर व खुडी निवासी दिनेश को गिरफ्तार किया। सीएमएचओ डॉ. विष्णु मीणा ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों को बुधवार को न्यायालय में पेश किया गया जहां से दोनों आरोपितों को एक दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। दूसरी गाडी में मौजूद आरोपित पोर्टेबल मशीन लेकर मौके से फरार हो गए। जिनकी तलाश जारी है।

30 हजार में जांच, लडक़ी तो गर्भपात के लिए 15 हजार अतिरिक्त

क्षेत्र में सक्रिय गिरोह भ्रूण परीक्षण के लिए महज 30 हजार रुपए ओर गर्भ में लडक़ी हो तो 15 हजार रुपए और देकर गर्भपात करवाते थे। लम्बे समय से मिल रही शिकायतो के बाद सक्रिय पीसीपीएनडीटी सेल ने मुखबिर के जरिए 30 हजार रुपए में गर्भवती महिला की जांच करवाई। जिसमें एक व्यक्ति मोटरसाइकिल पर पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन लेकर पहुंचा। ढाबे के पास खड़ी लग्जरी गाड़ी के चार्जर में मशीन का प्लग लगाकर गर्भवती की सोनोग्राफी की गई। टीम के दबिश देने से पहले ही सोनोग्राफी के बाद व्यक्ति पोर्टेबल सोनोग्राफी मशीन लेकर चला गया। जांच के बाद गर्भवती को लडक़ी होने की जानकारी दी। वही गर्भपात कराने के लिए अतिरिक्त 15 हजार रुपए की मांग की गई।

कमाई के चक्कर में बन बैठे दलाल

गिरफ्तार आरोपित में एक आरोपित बीए अंतिम वर्ष का छात्र है और एक छात्र वेटनरी कम्पाउंडर का कोर्स कर रहे हैं। पूछताछ में आरोपितों ने कबूला कि सोनोग्राफी मशीन और लग्जरी गाड़ी किसी से मांग कर लाते थे। भ्रूण परीक्षण के लिए वे मेडिकल स्टोर, जांच केन्द्रों के पास बैठे रहते थे। जहां जांच में गर्भवती होने की पुष्टि होने पर सीधे परिजनों से संपर्क करते और परीक्षण करवाने का ऑफर देते थे। प्रत्येक गर्भवती को जांच गिरोह तक पहुंचाने के लिए पांच हजार रुपए दिए जाते थे। दलाल हर माह 25 से 30 गर्भवती महिलाओं की जांच करवाने का कार्य करता रहा है। सभी दलालों ने भी अपने सब एजेन्ट बना रखे थे जिन पर दलाल खाने-पीने और मौज मस्ती के लिए रुपए खर्च करताा था।

-आरोपी (लाल घेरे में)