
छह साल से चेयरमैन का पद खाली, गांवों का राजस्व शहरों में लगाया
यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के गृह संभाग में ही यूआइटी की व्यवस्था बेपटरी है। यूआइटी में लगभग साढ़े पांच साल से अध्यक्ष का पद खाली है। इसलिए अध्यक्ष की कुर्सी भी जिला कलक्टर के जिम्मे है। कलक्टर के पास पहले से कई योजनाओं के काम होने से यूआइटी के कामकाज की पूरी तरह मॉनिटरिंग नहीं हो पा रही है। पिछले दिनों सरकार ने एक महीने में बड़े स्तर पर तबादले किए। इस दौरान यूआइटी में सचिव लगने की आस जगी। सरकार ने कई सीटों पर एक ही दिन में दो-दो बार तबादले भी कर दिए। लेकिन सरकार यूआइटी में स्टाफ लगाना पूरी तरह भूल गई। इसका खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है। वहीं अध्यक्ष सहित अन्य पद खाली होने की वजह से यूआइटी के बड़े प्रोजेक्टों को रफ्तार नहीं मिल रही है। शहरवासियों का कहना है कि दस साल पहले शहरवासियों के यूआइटी गठन के जरिए तरीह-तरह के सपने दिखाए गए, लेकिन ज्यादातर कागजी साबित हुए है।
यूआइटी ने दस साल में यह दिखाए सपने...
1. आवासीय योजना: दो बार बदली जमीन, कॉलोनी अभी तक नही
यूआइटी ने स्थापना के समय फतेहपुर रोड पर गोविन्द नगर आवासीय योजना का सपना शहरवासियों को दिखाया। यूआइटी ने शहरवासियों की अमानत राशि भी दो साल तक जमा रखी। शहरवासियों के विरोध और न्यायालय के निर्णय के बाद लोगों को राशि वापस मिली। इसके बाद यूआइटी ने दुजोद इलाके में कॉलोनी बसाने का सपना दिखाया। यह प्रोजेक्ट भी किसानों के विरोध की वजह से अटका हुआ है।
2. एज्युकेशन जोन व व्यावसायिक कॉम्पलेक्स:
यूआइटी की ओर से एज्युकेशन व व्यावसायिक कॉम्पलेक्स का सपना भी शहरवासियों को दिखाया गया। यह योजना भी अभी सिरे नहीं चढ़ सकी है। खास बात यह है कि यूआइटी की ओर से अभी इन दोनों प्रोजेक्टों के लिए जमीन आवंटन भी नहीं किया है। हालांकि यूआइटी के चार प्रवेश द्वारों का काम इस साल पूरा होगा।
गांवों से भी राजस्व अर्जन, सुविधाएं कुछ नहीं
यूआइटी की ओर से अपने क्षेत्र की ग्राम पंचायताें से लगातार आय अर्जन किया जा रहा है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्र में सुविधाएं विकसित करने में यूआइटी पीछे है। यूआइटी क्षेत्र के कई सरपंचों की ओर से लगातार विरोध भी किया जा रहा है। सरपंचों का कहना है कि जब यूआइटी की ओर से कॉलोनियों को अनुमति देन से जो आय हो रही है उसका कुछ फीसदी हिस्सा ग्रामीण क्षेत्र पर खर्च करना चाहिए।
ग्रीन जोन: कागजों में सिमटी योजना
यूआइटी की बोर्ड बैठक में शिक्षानगरी में ग्रीन जोन बढ़ाने के लिए कई बार योजनाएं बनाई गई। तीन साल पहले हाइवे के साथ मुख्य मार्ग पर पौधे लगाने की शुरूआत भी हुई। लेकिन इसके बाद योजना ठंडे बस्ते में उलझ गई।
रीको को बाईपास से जोड़ने की योजना भी अटकी
शहर में यातायात के बढ़ते प्रेशर को कम करने के लिए यूआइटी ने दस साल पहले रीको से बाईपास को जोड़ने की योजना बनाई थी। इसके लिए जमीन आवंटन के साथ आधे मार्ग पर सड़क भी बन गई। लेकिन स्मृति वन के पास अभी तक सड़क नहीं बन सकी। इस कारण यह योजना भी अभी तक अधरझूल में उलझी हुई है।
Published on:
20 Mar 2024 01:17 pm
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