
अनूठी परंपरा: चने तोडऩे की बजाय यहां उल्टे झाड़ पर लगाती है महिलाएं, मिठाई खाकर मारती है मुक्का
सीकर/शिश्यू. भारतीय संस्कृति पर्व पसंद है। जिसमें आए दिन कोई ना कोई पर्व आनंद व उत्साह लेकर आता रहता है। इन्हीं पर्वों से जुड़ी कुछ परंपराएं भी होती है। जिनको निभाने का आनंद ही कुछ अलग होता है। ऐसा ही एक पर्व तीज है। जो आस्था के साथ उल्लास का पर्व है। जिसे ग्रामीण अंचल में ओर भी खास तरीके से मनाया जाता है। इस बार पत्रिका ने तीज की जब अनूठी परंपराओं को तलाशा तो शिश्यू- रानोली में महिलाएं व युवतियां इसे हंसी ठिठोली के बीच बिल्कुल अलग अंदाज में मनाती नजर आई।
सजधज कर पहले चींटियों, फिर कौवों का भरा पेट
तीज के दिन यहां सुहागन महिलायें व युवतियां अल सुबह ही सज धजकर तैयार हो गई। जिन्होंने पर्व की शुरुआत धर्म से की। घर से बाहर निकलकर एकजुट होकर ये पहले चींटियों को भोजन कराने पहुंची। इसके बाद कौवों को रोटियां खिलाने का धर्म किया।
झाडिय़ों के लगाए चने
यूं तो चनों का झाड़ से तोड़ा जाता है लेकिन तीज पर गांव की महिलाएं उल्टे झाड़ों के कांटों पर भिगोए हुए चने लगाती नजर आई। दरअसल गांव में मान्यता है कि इस तरह चने लगाकर मनौती मांगने पर वह पूरी हो जाती है।
मिठाई खिलाकर मारती है मुक्का
शिश्यू- रानोली में मिठाई खिलाकर मुक्का मारने की परंपरा भी दिखी। महिलाएं व युवतियां यहां घर से ही मिठाई साथ लेकर आती है। जिसके बाद एक जगह बैठकर वह एक दूसरे को अपने हाथों से मिठाई खिलाती है। इसी बीच हंसी ठिठोली करती हुई वह एक दूसरे की पीठ पर मुक्का भी मारती है।
पहेली का जवाब देने पर झूले से उतरने की छूट
श्रावणी तीज पर गांव में झूलों का भी रिवाज है। जो साथ झूलती हुई सहेलियां एक दूसरे से पहेलियां भी पूछती है। पहेली के रूप में ही अपने पति का नाम बताने पर ही झूले से नीचे उतरने की अनुमति मिलती है। यूं दिनभर हंसी- मजाक व खेल के बाद शाम को तीज के मेले व पूजा के बाद इस दिन की मौज- मस्ती पर विराम लगता है।
Updated on:
02 Aug 2022 02:33 pm
Published on:
02 Aug 2022 02:23 pm
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