
विनोद सिंह चौहान. अजय शर्मा.
Uranium : राजस्थान अगले दो सालों में यूरेनियम का बढ़ा हब होगा। राज्य सरकार के खंडेला इलाके के रोयल में प्रस्तावित यूसीआईएल के प्रोजेक्ट को यूरेनियम उत्खलन के लिए एलओआई जारी करने के साथ खनन की तैयारी तेज हो गई है। पर्यावरण अनापत्त्ति प्रमाण पत्र, बिजली कनेक्शन व राजस्व विभाग से भूमि का अनापत्ति प्रमाण पत्र मिलने के बाद अगले दो साल में यूरेनियम की खुदाई शुरू होने की आस है। इसके बाद यानि 2025 तक सीकर के यूरेनियम से पूरा देश चमक सकेगा। खास बात यह है कि यूरेनियम की खुदाई के लिए सीकर से खंडेला इलाके में पानी पाइप लाइनों के जरिए जाना है। इसके लिए अब नए सिरे से एमओयू हो चुका है।
फिलहाल देश में अभी तक झारखंड के सिंहभूमि के जादूगोडा और आंध्र प्रदेश में यूरेनियम का उत्खनन किया जा रहा है। रोयल का प्लांट शुरू होने के बाद राजस्थान में देश का तीसरा प्लांट शुरू हो सकेगा। जबकि राजस्थान का यह पहला प्लांट होगा। एक्सपर्ट ने बताया कि यूरेनियम को मुख्य तौर पर बिजली बनाने के काम में लिया जाता है। परमाणु उर्जा के अलावा दवा, रक्षा उपकरणों, फोटोग्राफी सहित अन्य में भी यूरेनियम काम आता है। यूरेनियम कारपोरेशन ऑफ इंडिया की ओर इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग तीन हजार करोड़ का निवेश किया जाएगा। पिछले 15 वर्षो से इस प्रोजेक्ट की कवायल चल रही थी। वर्ष 2016 में यूरेनियम की पुष्टि होने के बाद प्रोजेक्ट को यूसीआईएल की ओर से कर्नाटक की तर्ज पर प्लांट लगाने की तैयारी शुरू की गई थी।
सीकर नगर परिषद से एमओयू, अगले साल से काम शुरू
सीकर नगर परिषद से यूसीआईएल और एक निजी कंपनी का एमओयू नए सिरे से हो चुका है। इसके तहत सीकर नगर परिषद क्षेत्र के सीवरेज के पानी को पाइपलाइनों के जरिए रोयल की पहाडिय़ों तक ले जाया जाएगा। इससे यहां खनन हो सकेगा। यह काम अगले साल फरवरी-मार्च महीने से शुरू होने संभावना है। पिछले दिनों इस प्रोजेक्ट की डीपीआर पर भी मुहर लग गई थी।
400 फीट नीचे से होगी खुदाई, इसलिए बनाई सुरंग
रोयल व सुहागपुरा गांव में 400 फीट नीचे से खुदाई शुरू होनी है। यूरेनियम की गुणवत्ता झारखंड के यूरेनियम के समान ही है। यहां चट्टानों के बीच में धार के रूप में यूरेनियम होने की पुष्टि हुई है। इसलिए यहां पहले सुरंग बनाई गई है। इस सुरंग के जरिए बड़े ट्रक यूरेनियम के भंडार वाली चट्टानों तक पहुंच सकेंगे।
आंकड़ों में समझें पूरे प्रोजेक्ट को
कहां है यूरेनियम: खंडेला इलाके के रोयल गांव में
प्रारंभिक जानकारी कब मिली: 1998 में
ड्रिल से खुदाई: 1999 से
यूरेनियम की पुष्टि: 2005 में
प्रोजेक्ट के लिए कवायद: 2016 से
यूरेनियम के लिए सुरंग: लगभग एक किलोमीटर
सुरंग की चौडाई: 6 मीटर
सुरंग पर खर्चा: 22 करोड़ से अधिक
कुल कितने करोड़ का प्रोजेक्ट: 3 हजार करोड़
रोयल में कितने भंडार की आस: 12 मिलियन टन
कितने क्षेत्र में यूरेनियम: 1086.46 हैक्टेयर
झारखंड के बाद सीकर में अपार भंडार, बढ़ेगा निवेश
देश में झारखण्ड और आंध्र प्रदेश के बाद राजस्थान में यूरेनियम के अपार भंडार मिले हैं। यूरेनियम दुनिया के दुर्लभ खनिजों में से एक माना जाता है। परमाणु उर्जा के लिए यूरेनियम बहुमूल्य खनिज है। यूरेनियम खनन क्षेत्र में आगे बढऩे के साथ ही प्रदेश में निवेश की संभावना भी बढ़ गई है।
12 मिलियन टन यूरेनियम के भंडार
सीकर जिले के खंडेला इलाके के रोयल गांव में 1086.46 हैक्टेयर क्षेत्र में यूरेनियम के विपुल भण्डार मिले हैं। खनिज विभाग की ओर से यूरेनियम कारपोरेशन ऑफ इंडिया के आवेदन पर खनिज यूरेनियम ओर व एसोसिएटेड मिनरल्स के खनन के लिए एलओआई पिछले महीने जारी की गई है। इस क्षेत्र में लगभग 12 मिलियन टन यूरेनियम के भंडार होने की संभावना है।
दुनिया में सर्वाधिक यूरेनियम यहां
भारत के अलावा दुनिया के कई देशों में यूरेनियम के भंडार है। दुनिया में सर्वाधिक यूरेनियम का उत्पादन कजाकिस्तान, कनाडा और आस्ट्रेलिया में होता है। इसके अलावा निगेर, रुस, नामीबिया, उज्बेकिस्तान, यूएस व यूक्रेन में भी यूरेनियम खनिज मिला है।
3 हजार करोड़ का होगा निवेश, पांच हजार को रोजगार
यूरेनियम कारपोरेशन ऑफ इंडिया की ओर से खंडेला के रॉयल इलाके में लगभग 3 हजार करोड़ का निवेश किए जाने की संभावना है। यूरेनियम प्लांट से सीकर जिले के लगभग 5 हजार लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार मिल सकेगा। वहीं सह उत्पादों के आधार पर क्षेत्र में सह उद्योग की स्थापना की राह भी प्रशस्त होगी।
आगे क्या: अब ईसी लेने में जुटा यूसीआईएल
यूरेनियम कारपोरेशन इंडिया की ओर से परमाणु उर्जा विभाग, परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय हैदराबाद से खनन योजना अनुमोदित कराकर राज्य सरकार को प्रस्तुत की जाएगी। इसी तरह से खान विकास एवं उत्पादन करार एमडीपीए के समय खनिज रिजर्व मूल्य 0.50 प्रतिशत राशि परफारमेंस सिक्यूरिटी बैंक गांरटी के रुप में दी जाएगी। वहीं खनन के लिए पर्यावरण की ईसी लेनी होगी। इसके अलालवा 69.39 हैक्टेयर चरागाह भूमि की राजस्व विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होगा।
ऐसे समझें ए टू जेड
-यहां के यूरेनियम से 40 साल तक 800 मेगावाट बिजली प्राप्त की जा सकती है। अब तक के अन्वेषण के अनुसार खंडेला के यूरेनियम भंडार की गुणवत्ता देश में सबसे बेहतर है।
-शेखावाटी में झुंझुनूं जिले के उदयपुरवाटी क्षेत्र के जहाज,नृसिंहपुरी व नीमकाथाना क्षेत्र के तीन गांवों में भी यूरेनियम के भंडार होने की संभावना जताई गई है।
-खंडेला जयपुर व दिल्ली से ज्यादा दूर नहीं होने से यूरेनियम सप्लाई में ज्यादा खर्चा नहीं आएगा। शेखावाटी के अन्य क्षेत्रों में भी यूरेनियम भंडार होने से हैदराबाद की तर्ज पर यहीं पर प्रोसेसिंग प्लांट भी लगाया जा सकता है।
Updated on:
13 Jul 2022 10:43 am
Published on:
13 Jul 2022 10:37 am
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