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बिन व्याख्याता टूट रहा बेटियों का सपना

सीकर के दूसरे सबसे बड़े महाविद्यालय एसएनकेपी में व्याख्याताओं के आधे से ज्यादा पद रिक्त होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई चौपट हो रही है। एसएनकेपी राजकीय महाविद्यालय से सात व्याख्याताओं का तबादला किया गया। इनके स्थान पर एक का भी तबादला इस महाविद्यालय में नहीं किया गया।

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cbse teachers award

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मुकेश निराणियां @ नीमकाथाना. जिले के दूसरे सबसे बड़े महाविद्यालय एसएनकेपी में व्याख्याताओं के आधे से ज्यादा पद रिक्त होने से विद्यार्थियों की पढ़ाई चौपट हो रही है। एसएनकेपी राजकीय महाविद्यालय से सात व्याख्याताओं का तबादला किया गया। इनके स्थान पर एक का भी तबादला इस महाविद्यालय में नहीं किया गया।
वहीं शहर के कमला मोदी महिला महाविद्यालय में कॉलेज व्याख्याताओं की कमी के कारण पढ़ाई बाधित हो रही है। एसएनकेपी राजकीय महाविद्यालय से हाल में आयुक्तालय ने सात व्याख्याताओं के तबादले किए, लेकिन आयुक्तालय ने इन तबादलों के बदले एक भी व्याख्याता नहीं लगाया। महाविद्यालय में कई विषयों के छह से सात पद स्वीकृत है, जिनमें आधे से ज्यादा पद खाली हैं। वहीं इन विषय अध्यापकों को विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रम के साथ आयुक्तालय के आदेशानुसार कॉलेज में ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाने के लिए कालांश लेने पड़ रहे हैं।
ऐसे में न तो विवि का पाठ्यक्रम पूरा हो पा रहा है और न ही प्रतियोगी परीक्षाओं का पाठ्यक्रम पूरा हो रहा। वहीं कमला मोदी में व्याख्याताओं के ८ पद रिक्त हैं। एसएनकेपी महाविद्यालय में ५०९८ विद्यार्थी तथा कमला मोदी महाविद्यालय में करीब २२०० छात्राएं अध्ययनरत हैं। एसएनकेपी महाविद्यालय में कुल ५०९८ विद्यार्थी हैं, जिनमें से २०७० छात्राएं तथा ३०२८ छात्र हंै। शहर के दोनों राजकीय महाविद्यालय में ४०-५० किमी. दूर से विद्यार्थी आते हैं। इन कॉलेजों के कुछ व्याख्याताओं को लगातार चार घंटे तक अध्यापन कार्य करवा रहे है। वहीं नॉन टीङ्क्षचग पद रिक्त होने के कारण उन पदों का कार्यभार भी है। एसएनकेपी कॉलेज में ५ हजार के पार विद्यार्थियों में २५०५ विद्यार्थियों का केवल एक व्याख्याता के भरोसे हंै जबकि कॉलेज में ४ पद स्वीकृत है। इसी प्रकार इतिहास के १४४२ विद्यार्थी की ६ स्वीकृत व्याख्याताओं मे से १ व्याख्याता के भरोसे पढ़ाई चल रही है। ५ व्याख्याताओं के पद रिक्त हैं। रसायन शास्त्र में भी ५ स्वीकृत पदों में ४ पद रिक्त हैं। ईएफएम व बीडीएमए की भी हालत ये ही है।