
रींगस (सीकर). जितना निराला बाबा खाटूश्यामजी का दरबार है, उतने ही निराले इसके भक्त भी हैं। लाखों भक्त लक्खी मेले में खाटू पहुंचकर श्याम चरणों में निशान अर्पित करते हैं, मगर बाबा श्याम की ऐसी दीवानी युवती आरती भी है, जो दिन में रोजाना 17 किलोमीटर का पैदल सफर तय करके खाटूश्यामजी पहुंचकर कुल 21 निशान चढ़ाती है।
जानिए कौन है बाबा की ये अनूठी भक्त
-दिन में रोजाना निशान चढ़ाने जाने वाली आरती अजमेर की रहने वाली है।
-आरती सुबह निशान लेकर रींगस से 17 किलोमीटर दूर खाटूश्यामजी पैदल जाती है।
-बाबा श्याम के दरबार में निशान चढ़ाने के बाद आरती खाटू में ही धर्मशाला में विश्राम करती है।
-आरती वर्ष 2010 से लेकर अब तक बाबा श्याम को चार हजार से अधिक निशान चढ़ा चुकी है।
-पहले तो आरती साल में कभी कभार ही खाटूश्यामजी आती थी।
-बाबा श्याम की लगन लगने पर पिछले 4 साल से यहां आकर रहने लगी।
-इसके बाद शुरू हुआ बाबा श्याम को रोजाना निशान चढ़ाने का सिलसिला, जो 4 साल से जारी है।
पहले 11 फिर 21 निशान
आरती शुरुआत में रोजाना एक निशान लेकर बाबा श्याम को चढ़ाने रींगस से खाटू जाती थी। फिर 11 निशान और इसके बाद बाबा श्याम की भक्ति में आरती इस कदर लीन हो गई कि दिन में रोजाना 21 निशान चढ़ाने शुरू कर दिए। 21 निशान का वजन करीब बीस किलोग्राम होता है। प्रतिदिन 21 निशान चढ़ाने का सिलसिला बाबा श्याम के जन्मोत्सव 2017 से शुरू किए हैं।
रींगस में खरीदे 21 सौ निशान
बाबा श्याम के दरबार में रोजाना 21 निशान चढ़ाकर आने वाली आरती का कहना है कि वह फाल्गुन लक्खी मेले से पहले बाबा को 21 सौ निशान चढ़ाएगी। इसके लिए रींगस में एक दुकान से आरती ने 21 सौ निशान खरीद रखे हैं। रींगस की परसरामपुरिया धर्मशाला में पहले निशान की पूजा अर्चना करती है। फिर निशान को लेकर खाटू रवाना होती है।
बाबा श्याम करते हैं हर मन्नत पूरी
आरती के पिता रामस्वरूप टांक का कहना है कि उनकी बेटी बाबा श्याम के दर पर निशान चढ़ाती है तो बाबा श्याम भी उसकी हर मन्नत पूरी करते हैं। बाबा श्याम के आर्शीवाद से आरती को पदयात्रा से एक भी छाला नहीं हुआ।
नौकरी छोड़ बाबा श्याम की शरण में
एपीपी पद से रिटायर्ड रामस्वरूप की 28 साल की अविवाहित बेटी आरती ने समाज शास्त्र में एमए कर रखा है। पढ़े-लिखे परिवार से ताल्लुक रखती है। पहले निजी अस्पताल में नौकरी भी करती थी। शुरुआत में 15 दिन नौकरी और 15 दिन खाटू आकर बाबा की भक्ति करती थी। वर्ष 2010 में बाबा श्याम का रंग ऐसा चढ़ा कि नौकरी छोडकऱ खाटूश्यामजी आ गई। आरती की भक्ति देखकर खाटूश्यामजी में मुम्बई वालों की श्याम कीर्तन मंडल धर्मशाला में इनके लिए एक कमरा आजीवन मिला हुआ है।
Published on:
02 Nov 2017 11:36 am
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