
चला (सीकर). राजस्थान के सीकर जिले में गुहाला के हंसनला बालाजी धाम पर सोमवार का दिन अलौकिक व ऐतिहासिक रहा है। यहां पिछले दस दिन से मंहत हनुमानदास मौनी महाराज के सानिध्य में चल रहे 108 कुण्डीय श्रीराम महायज्ञ की पूर्णाहुति हुई।
इस दौरान लाखों श्रद्धालुओं की संख्या में उपस्थित संत समाज,भक्तजनों ने कुछ पल चुप्पी साध ली और मौनी बाबा ने दृढ़ संकल्प करके मौन साधना को ‘सीताराम’ शब्द बोलते हुए तोड़ा तो वह पल एक धार्मिक रोमांच से सराबोर हो गया। उपस्थित जन समुदाय जय श्रीराम और मौनी बाबा के जयकारों के उद्घोष से पांडाल आधे घंटे तक गुंजायमान रहा।
उल्लेखनीय है कि हंसनला बालाजी धाम पर पिछले 31 वर्षों से संत शिरोमणी हनुमानदास मौनी महाराज मौन व्रत रखे हुए तपस्यारत हंै। उनके द्वारा की गई जनकल्याण की तपस्या को पूरी होते देखने भक्तों की एक बहुत बड़ी भीड़ साक्षी रही। महायज्ञ के अंतिम दिन सोमवार को पूर्णाहुति पर देर रात तक करीब ढाई लाख लोगों ने यज्ञ परिक्रमा कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
यज्ञाचार्य नरोत्तम शास्त्री, उपाचार्य पंडित रविन्द्र शास्त्री के सानिध्य में महायज्ञ पूर्णाहुति कुल पांच लाख इक्यावन हजार आहुतियों के साथ विधि विधान व वैदिक मंत्रोचारण से हुआ।
जानिए किसने क्या कहा
रैवासा पीठाधीश्वर राघवाचार्य महाराज
हंसनला महायज्ञ पूर्णाहुति पर पींडीया धाम नागौर रणजीतदास महाराज, भोलाराम बापजी की देवरिया भोपालगढ़ महंत रामदास शास्त्री जोधपुर , शीतल धाम महंत रामस्वरूपदास महाराज ठीकरिया के सानिध्य में विशाल धर्म सभा आयोजित हुई जिसमें रैवासा पीठाधीश्वर राघवाचार्य महाराज ने कहा कि इस कलिकाल में यज्ञ से बढकर कोई दूसरा पुरूषार्थ नहीं है।
बाहुबली देवाचार्य बलदेवदास महाराज
बाहुबली देवाचार्य बलदेवदास महाराज कालाकोटा ने कहा कि यज्ञ के साथ मौन साधना की क्रियान्विती साधक को उच्चकोटि की आध्यात्मिक शक्ति की प्राप्ति होती है।
पलसाना मंहत मनोहरशरण महाराज
पलसाना मंहत मनोहरशरण महाराज ने कहा कि त्रेता युग व द्वापर युग से श्रेष्ठ कलयुग है कलयुग में प्रत्येक मनुष्य संतरूपी जन्म लेने को बेताब रहता है तथा यज्ञ जैसे धार्मिक पुनित कार्य में विश्व का कल्याण समाहित है।
500 वर्ष का इतिहास समेटे है हंसनला धाम
पचलंगी. सीकर-झुंझुनूं सीमा पर स्थित हंसनला धाम का 500 वर्ष का इतिहास समेटे हुए हैं। यहां का प्राचीन हनुमान मंदिर संतों की तपोस्थली रहा है। धाम में विश्राम दास महाराज ने निर्जन वन में तपस्या की और इसके बाद रामशरण त्यागी महाराज और अब पलटू दास अखाड़ा अयोध्या के संत हनुमान दास मौनी बाबा पिछले 25 वर्ष पूर्व स्थान की बागडोर संभाली थी। बाबा ने धाम का विकास किया व इसको आगे बढ़ाया धाम से जुड़े उमराव सैनी ने बताया की धाम मे 1996 में जन सहयोग से राम मंदिर का निर्माण किया गया। 1997 अन्नपूर्णा माता का मंदिर बनाया गया जनकल्याण के लिये बाब ने यहा आने से पूर्व मोन व्रत ले रखा था बाब की 31 वर्ष की तपस्या पूरी होने पर यज्ञ आयोजन किया गया। इस अवसर पर 21 अक्टूबंर को कलश यात्रा के साथ राम कथा का आयोजन हुआ।
इन्होंने ने किया सम्बोधित
धर्म सभा को चारौडा धाम मंहत दिनेशदास महाराज खंडेला, माधवदास महाराज नृसिंहपुरी, अघोरी मंहत शैलेन्द्रस्वरूप महाराज मुंकदगढ, सियारामदास महाराज जयपुर , भरतदास खाचरियावास, कालीदास नायन, आयोध्यादास जयपुर, प्रहलाददास शिवसिंहपुरा राडावास, रसिकशरण, राजेन्द्रदास करणपुरा सहित अनेक संत विद्वानों ने संबोधित किया।
21 सौ संतों की हुई विदाई
हंसनला महायज्ञ की पूर्णाहुति पर विभिन अखाड़ों और मंडलों से आए साधु समाज की विदाई महायज्ञ कमेटी अध्यक्ष मदनलाल भावरिया, कोषाध्यक्ष कालूराम ठेकेदार, सेवा समिति अध्यक्ष मिस्त्री बद्रीप्रसाद सैनी, उरण शिव मित्र मण्डल अध्यक्ष बाबूलाल भील, भागीरथमल मिश्रा मावता की देखरेख में विधि विधान से विदाई महायज्ञ कमेटी व भामाशाह-समाजसेवी संावरमल गुढ-गौडजी के सहयोग से हुई। इस अवसर पर सताईसा मंडल, बत्तीसा मंडल, पैंतालिसा मंडल, शेखावाटी मंडल, लोहार्गल मंडल व जयपुर मंडल के कुल 21 सौ साधु संतों की विदाई हुई।
Published on:
31 Oct 2017 12:02 pm
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