सीकर.
राजस्थान बजट 2018-19 में किसानों के 50 हजार रुपए तक के कर्ज माफी और प्रदेश में कर्जा मुक्ति बोर्ड के गठन की घोषणा की गई है। इस घोषणा पर किसान नेता और सीकर किसान आंदोलन के हीरो अमराराम ने राजस्थान पत्रिका डॉट कॉम से बातचीत में राजस्थान सरकार पर बेईमानी का आरोप लगाया है।
किसान नेता अमराराम का कहना है कि पिछली साल राजस्थान सरकार ने सरसों और मूंगफली खरीद का समर्थन मूल्य घोषित होने के बाद भी समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं करके सभी किसानों को नुकसान पहुंचाया था। इसलिए खेती के साथ-साथ व्यापार करने और इनकम टैक्स चुकाने वाले किसानों को छोडकऱ शेष सभी किसानों के कर्ज माफी के लिए सीकर आंदोलन शुरू किया गया था, जो एक सितम्बर 2017 से 13 सितम्बर 2017 तक चला।

राजस्थान बजट 2018-19 : सीकर किसान आंदोलन लाया रंग, प्रदेशभर के किसानों के कर्ज माफी की घोषणा
उसी किसान आंदोलन की बदौलत राजस्थान सरकार ने बजट 2018-19 में लघु व सीमांत किसानों के 50 हजार रुपए तक के कर्ज माफी की घोषणा की है, वो भी सिर्फ कॉपरेटिव सोसायटी से लिए गए ऋण के संबंध में। जबकि ये जरूरी नहीं किसानों ने केवल कॉपरेटिव से ही ऋण लिए हैं।
किसानों ने ग्रामीण बैंक और वाणिज्यक बैंकों से भी ऋण ले रखे हैं। सीकर के किसानों ने सभी किसानों के सभी बैंकों के ऋण माफ करवाने के लिए आंदोलन किया था। जबकि सरकार ने केवल लघु और सीमांत किसानों के कॉपरेटिव बैंक के ही कर्ज माफ की घोषणा की है।
ऐसे में सरकार ने किसानों से बेईमानी की है। जो समझौता किसानों और सरकार के बीच हुआ था। उससे वादा खिलाफी का काम राजस्थान सरकार ने बजट में किया है।
कर्जा मुक्ति बोर्ड सिर्फ दिखावा
किसान नेता अमराराम का कहना है कि राजस्थान बजट 2018-19 में किसान कर्जा मुक्ति बोर्ड के गठन की घोषणा की गई है जबकि ये प्रशासनिक आदेश से होगा, जिसका कोई औचित्य नहीं है। इन्हें कर्जा मुक्ति बोर्ड का गठन केरल विधानसभा की तर्ज पर कानून पास करके करना चाहिए था। ताकि राज्य सरकार उस बोर्ड के आदेश मानने को बाध्य हो। सिर्फ प्रशासनिक आदेशों से गठित किए गए बोर्ड के आदेश कोई नहीं मानेगा।