
दांतारामगढ़ (सीकर).
शेखावाटी की धरती पर भी अब सफेद सोना (कपास) निपजेगा। इतना ही नहीं एक बार बोया पौधा कम पानी में भी करीब 15 साल तक फसल देगा। जी हां, हम बात कर रहे है सफेद सोना कहे जाने वाली कपास की खेती की। सीकर जिले के गांव दांता के प्रगतिशील किसान सुण्डाराम वर्मा ने कम पानी में तैयार होने वाली कपास की उन्नत किस्म तैयार की है।
दांता के धाबाई वाली कोठी पर अपने ही खेत में सुण्डाराम वर्मा ने प्रायोगिक तौर पर पर कपास की फसल तैयार की है। कपास के यह पौधे तीन साल के हो चुके हैं, जो करीब पन्द्रह साल तक कपास देंगे। सुण्डाराम बताते हैं कि कपास के एक पौधे के पहली साल करीब पचास डोडे लगेेंगे। दूसरी साल करीब सौ तथा तीसरी साल से प्रतिवर्ष करीब दौ सौ डोडे एक पौधे पर आएंगे। एक डोडे में करीब 170 मिली ग्राम कपास निकलेगी।
उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष करीब डेढ़ फीट पर कपास के पौधे की कंटिग की जाती है। तथा एक वर्ग फीट में एक पौधा तैयार होता है। कपास की उन्नत फसल कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है। किसान सुण्डाराम वर्मा ने बताया कि इस कपास की विशेषता है कि यह भीषण कर्मी में भी हरी रहती है। मई जून माह की भीषण गर्मी कपास पर बेअसर रहती है।
कपास के नीचे उगा घास व अन्य पौधे जहां गर्मी में जल जाते हैं, वहीं कपास का पौधा हरा रहता है तथा निरन्तर फसल देता है। सुण्डाराम वर्मा ने अनेक नवाचार किए हंै। नवाचारों व उन्नत किस्म की फसल तैयार करने पर इनको राष्ट्रपति भी सम्मानित कर चुके हैं।
-दांतारामगढ़ से राजेश वैष्णव की रिपोर्ट
Updated on:
26 Jan 2018 10:03 am
Published on:
25 Jan 2018 06:08 pm

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