30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

VIDEO : शेखावाटी के किसान का कमाल, एक बार की बुवाई से 15 साल तक मिलेगी पैदावार

kapas ki kheti : सीकर जिले के गांव दांता के प्रगतिशील किसान सुण्डाराम वर्मा ने कम पानी में तैयार होने वाली कपास की उन्नत किस्म तैयार की है।

2 min read
Google source verification
sikar kisan

दांतारामगढ़ (सीकर).

शेखावाटी की धरती पर भी अब सफेद सोना (कपास) निपजेगा। इतना ही नहीं एक बार बोया पौधा कम पानी में भी करीब 15 साल तक फसल देगा। जी हां, हम बात कर रहे है सफेद सोना कहे जाने वाली कपास की खेती की। सीकर जिले के गांव दांता के प्रगतिशील किसान सुण्डाराम वर्मा ने कम पानी में तैयार होने वाली कपास की उन्नत किस्म तैयार की है।

PHOTOS : सीकर में इस जगह हो रही मोती की खेती, किसान की सालाना कमाई एक करोड़ रुपए


दांता के धाबाई वाली कोठी पर अपने ही खेत में सुण्डाराम वर्मा ने प्रायोगिक तौर पर पर कपास की फसल तैयार की है। कपास के यह पौधे तीन साल के हो चुके हैं, जो करीब पन्द्रह साल तक कपास देंगे। सुण्डाराम बताते हैं कि कपास के एक पौधे के पहली साल करीब पचास डोडे लगेेंगे। दूसरी साल करीब सौ तथा तीसरी साल से प्रतिवर्ष करीब दौ सौ डोडे एक पौधे पर आएंगे। एक डोडे में करीब 170 मिली ग्राम कपास निकलेगी।

गैंग्स ऑफ सीकर : 17 साल में 18 मर्डर, अब राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018 से पहले गैंगवार की आशंका, जानिए कौन है सबसे बड़ा डॉन

उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष करीब डेढ़ फीट पर कपास के पौधे की कंटिग की जाती है। तथा एक वर्ग फीट में एक पौधा तैयार होता है। कपास की उन्नत फसल कम पानी में भी अच्छी पैदावार देती है। किसान सुण्डाराम वर्मा ने बताया कि इस कपास की विशेषता है कि यह भीषण कर्मी में भी हरी रहती है। मई जून माह की भीषण गर्मी कपास पर बेअसर रहती है।

कपास के नीचे उगा घास व अन्य पौधे जहां गर्मी में जल जाते हैं, वहीं कपास का पौधा हरा रहता है तथा निरन्तर फसल देता है। सुण्डाराम वर्मा ने अनेक नवाचार किए हंै। नवाचारों व उन्नत किस्म की फसल तैयार करने पर इनको राष्ट्रपति भी सम्मानित कर चुके हैं।

-दांतारामगढ़ से राजेश वैष्णव की रिपोर्ट

Story Loader