
सीकर। जिले के ग्रामीण इलाके में स्वास्थ्य सेवाएं भगवान भरोसे हैं। मरीजों को इलाज की बजाए केवल आश्वासन ही मिल रहा है। हर बार जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में सीएचसी व पीएचसी पर बेहतर व्यवस्थाओं को लेकर चिकित्सकों की ओर से दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति उलट है।
पत्रिका टीम ने सेहत सुधारो सरकार अभियान के तहत जब जिले में पीएचसी व सीएचसी के हालात देखे तो सच्चाई रोंगटे खड़ी करनी वाली सामने आई। हालात यह है कि चिकित्सा विभाग की अहम कड़ी होने के बावजूद सीएचसी व पीएचसी पर ड्यूटी के समय के दौरान भी चिकित्सक तक नहीं मिलते हैं।
सीएचसी व पीएचसी पर निशुल्क जांच योजना तो महज खून की जांच तक सिमट कर रह गई। इन अस्पतालों रात को स्टॉफ भी नहीं ठहरता। मरीजों को मजबूरी में निजी अस्पतालों में जाना पड़ रहा है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
LIVE स्थान : बाजौर पीएचसी, समय: 11 बजकर 45 मिनट
प्रभारी चिकित्सक डा. सुनील चौधरी का चैम्बर खाली। तीन कमरों में संचालित पीएचसी में दस कर्मचारियों का स्टॉफ है जो अस्पताल में मौजूद स्टॉफ एक कमरे में बातचीत में लगा हुआ है। सीकर से रोजाना अपडाउन करने वाला स्टॉफ आवास नहीं होने से तय समय के बाद आया और तय समय से पहले ही चला गया।
चार गांवों के मरीज, फिर भी नहीं मिलती सुविधाएं
बाजौर, कहारों की ढाणी, नीमकी ढाणी, झुंझारमठ सहित आस-पास के इलाके मरीज बाजौर पीएचसी में इलाज के लिए आते हैं लेकिन यहां पीएचसी की स्वास्थ्य सेवाओं से ग्रामीण नाखुश नजर आए। पैर दर्द से पीडि़त और दिव्यांग गांव के हिम्मत सिंह ने बताया कि यहां का स्टॉफ समय पर कभी नहीं आता है। मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। नाम नही छापने की शर्त पर अस्पताल के पास रहने वाले एक व्यक्ति ने बताया कि प्रसव के बाद यहां प्रसूता के परिजनों से रुपए लिए जाते हैं। इसके अलावा गर्भवती महिलाओं की जांच केवल कागजों मे कर दी जाती है लेकिन प्रसव का समय आता है तो स्टाफ प्रसूता को रैफर कर देता है।
LIVE स्थान : सांगरवा पीएचसी, समय : 12 बजकर 25 मिनट
स्वास्थ्य केन्द्र पर दो चिकित्सक सहित दस कर्मचारियों का स्टॉफ है, लेकिन एक लैब टेक्निीशियन व एक एएनएम मौजूद है। महज 10 मिनट के अंतराल पर बगडियों की ढाणी निवासी हेमाराम व सांगरवा निवासी बाबूलाल उपचार के लिए आए लेकिन चिकित्सक नहीं होने से उपचार नहीं मिला। पीएचसी में खंडेला, रानोली, शोभ, खेत, श्यामगढ़, टोड़ी माधोपुर, चनेजा की ढाणी सहित क्षेत्र के सैकड़ों लोग उपचार के लिए आते हैं।
एक कमरे में संचालित पीएचसी
सांगरवा पीएचसी में कहने को तीन कमरे बने हुए लेकिन एक में लेबर रुम और एक कमरे में जीएनएम रह रही है। संविदा कर्मी के रहने से उपचार के लिए महज एक ही कमरा बच गया है। जिसमें मरीजों की जांच, दवा वितरण व इंडोर मरीज को रखने की सुविधा है। निशुल्क दवा के नाम पर हजारों रुपए खर्च करने के सरकारी दावों के बावजूद पीएचसी पर एचबीएसएजी सरीखी जरूरी जांच तक नहीं हो पाती है। जबकि अस्पताल प्रबंधन ने करीब छह माह पहले ही नए भवन के लिए रजिस्ट्री जिला चिकित्सा विभाग के अधिकारियों को सौंप दी है।
स्थान : सिरोही पीएचसी, समय: 11.55 बजे
नीमकाथाना। सिरोही गांव स्थित पीएचसी पर पिछले डेढ़ माह से एक चिकित्सक ही नहीं पहुंच रहा है। पीएचसी पर मरीजों का दवाब ज्यादा होने व स्टॉफ नहीं होने से अक्सर झगड़ते रहते हैं। रात के समय मरीज केवल नर्सिंगकर्मी की पीएचसी पर रहता है। पीएचसी पर बना लेबर रूम की जालियां टूट चुकी है। रेडियंट वार्मर पर धूल जम रही है। प्रभारी डा. राम सिंह ने बताया कि डेढ माह पहले ज्वाइन करने वाले चिकित्सक वापस नहीं लौटी है। स्टाफ कम हेाने के बावजूद सभी मरीजों का समय पर उपचार किया जाता है।
Updated on:
14 Sept 2017 10:22 pm
Published on:
14 Sept 2017 08:28 pm
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