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पहल: सरकारी स्कूल या निजी स्कूल..? इस स्कूल की कक्षाओं को देखकर आपको भी नहीं होगा यकीन…

सरकारी स्कूलों के बच्चों के सिर से भी पढ़ाई का बोझ कम होगा। इसके लिए सामूहिक प्रयास किया है नरोदड़ा गांव के ग्रामीणों व स्कूल के शिक्षकों की टीम ने।

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लक्ष्मणगढ़.

अब सरकारी स्कूलों के बच्चों के सिर से भी पढ़ाई का बोझ कम होगा। इसके लिए सामूहिक प्रयास किया है नरोदड़ा गांव के ग्रामीणों व स्कूल के शिक्षकों की टीम ने। निजी स्कूलों की तर्ज पर स्कूल के प्राथमिक कक्षा के कक्षा कक्षों को पूर्णत: पढ़ाई से बोझमुक्त वातावरण के रूप में तैयार किया गया है। माध्यम बना है पत्रिका का नींव अभियान।
संस्था प्रधान रश्मि दाधीच के प्रयासों के तहत नवाचार की प्रथम श्रृंखला में कक्षा कक्षों पर बच्चों के आखर ज्ञान से संबंधित भित्ति चित्र बनाए गए हैं। बच्चों के लिए ग्रामीणों ने फर्नीचर, लेखन बोर्ड, बारखड़ी, एबीसीडी चार्ट, वर्ण ज्ञान, अक्षर ज्ञान सहित अनके व्यवस्थाएं की हैं, ताकि बच्चों को निजी स्कूलों की तर्ज पर प्राथमिक स्तर पर खेल खेल में ही पढ़ाई का ज्ञान हो सके। गत दो साल तक यहां 100 बच्चे पढ़ रहे थे। ग्रामीणों और शिक्षकों ने मेहनत की तो नतीजा यह रहा कि यहां पर डेढ़ सौ बच्चों का नामांकन बढ़कर कुल नामांकन 250 बच्चे हो गया। गत माह शिक्षा विभाग ने भी स्कूल को उच्च माध्यमिक स्तर पर क्रमोन्नत करके ग्रामीणों को तोहफा प्रदान किया है। बच्चों की शिक्षा व स्कूल का स्तर सुधारने के लिए ग्रामीण व शिक्षक लगातार मेहनत कर रहे हैं।

साल से शत प्रतिशत परिणाम

संस्था की कक्षा 10वीं बोर्ड परीक्षा का परिणाम पिछले सात साल से लगातार शत प्रतिशत रहता आ रहा है, जो कि पूरे सीकर जिले में अपने आप में एक रिकॉर्ड है। ग्रामीणों ने इसके साथ ही अब 12वीं बोर्ड का परीक्षा परिणाम भी शत प्रतिशत रखने के लिये कमर कस ली है।

सरपंच महेन्द्र ख्यालिया ने बताया कि स्वीकृति के बाद शिक्षा विभाग से भी स्कूल में रिक्त पदों पर यथाशीघ्र स्टाफ लगाने की उम्मीद है। सरपंच ने बताया कि बच्चों के नामांकन बढ़ाने के लिये शिक्षकों के साथ ग्रामीण भी डोर टू डोर अभिभावकों से संपर्क करते हैं। गत दिनों स्कूल परिसर को हरियाली से आच्छादित करने के उद्देश्य से ग्रामीणों ने पत्रिका के हरियालों राजस्थान कार्यक्रम के अंतर्गत एक सौ एक पौध भी लगाए थे।