
राजस्थान में यहां दशहरे पर पक्षी नहीं दिखने तक रातभर नाचते हैं ग्रामीण, अनूठा है दक्षिण भारतीय शैली का ये मेला
सीकर/दांता. राजस्थान के सीकर जिले के दांता कस्बे के कांकरा गांव में स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर प्रांगण में करीब 300 वर्ष से आयोजित हो रहा दक्षिण भारतीय शैली का दशहरा मेला कई मायनों में अनूठा व अजब संयोग लिए है। यहां भरतनाट्यम व राम-रावण की सेना की लड़ाई सहित देवी देवताओं की जीवंत झांकियों के साथ नृत्य पूरी रात होता है। खास बात ये है कि ग्रामीण सुबह तक भी तब तक नृत्य जारी रखते हैं जब तक गांव में नीलटास पक्षी ना दिखाई दे। यह रोचक संयोग भी है कि दशहरे की अगली सुबह ये पक्षी गांव में दिखाई भी देता है। जिसके बाद ही मेले का समापन होता है। गांव के शांतिलाल शर्मा ने बताया कुछ वर्षों पहले सुबह 10 तक नीलटांस पक्षी दिखाई नहीं दिया और कलाकार पूरी रात से नृत्य करते करते थक चुके थे। नरसिंह अवतार की झांकी प्रदर्शन के दौरान इसी बीच करीब 10.45 बजे नीलटास पक्षी दिखा। जिसे देख गांव वालों ने तालियों की गडगड़़ाहट के साथ दशहरे मेले का समापन किया।
भरत नाट्यम के साथ लीलाओं का मंचन
दशहरे मेले के दौरान नृत्य नाटिका व भरतनाट्यम के दौरान करीब 24 जीवंत झांकिया होती है और उसके दौरान 10 देवताओं के अवतार भी होते हैं। दशहरे पर जीवंत झांकियों में भरतनाट्यम दक्षिण नृत्य प्रणाली से मुख्य रूप से रावण के घमंड को कई रूपों में दर्शाया जाता है और कई घंटों तक रावण सभा चलती है। इसमें सर्वप्रथम विभीषण रावण को समझाने आते हैं फिर मंदोदरी उन्हें समझाती है और लक्ष्मण संवाद भी होता है। इस तरह कई लोग रावण को समझाते हैं, लेकिन रावण का घमंड सातवें आसमान पर रहता है और उसी घमंड को पूरी नृत्य नाटिका में बड़े ही जोर शोर से दिखाया जाता है और फिर अंत में रावण का अंत हो जाता है।
तीन जगह पर है लक्ष्मीनाथ मंदिर
जानकारी अनुसार खंडेला दरबार द्वारा उस समय दांतारामगढ़ इलाके में 3 गांव में ही लक्ष्मीनाथ मंदिर बनाए गए थे, जिसमें बाय, करड़ ,कांकरा गांव है। इनमें कई वष पुराने लक्ष्मीनाथ मंदिर है और उनमें से बाय व कांकरा में दक्षिण भारतीय प्रणाली से दशहरा मनाया जाता है। गांव के बुजुर्गों ने बताया कि कई वर्षों पहले यहां के कुछ ब्राह्मण समाज के लोग दक्षिण भारत गए थे और वहां से भरतनाट्यम सहित वहां की दशहरे की परंपरा को सीख कर आए थे। इसके बाद पूरे इलाके में केवल तीन जगह पर ही इस परंपरा से दशहरा मनाया जाता है, जिनमें हरसोली रेनवाल, बाय व कांकरा में ही दक्षिण भारतीय प्रणाली से भरतनाट्यम सहित जीवंत झांकिया सजाते हुए दशहरा मनाया जाता है।
Published on:
05 Oct 2022 01:35 pm
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