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Rajasthan Wedding Card: खूब पसंद आ रहा सरकारी शिक्षक की शादी का ये कार्ड, पेश की ऐसी अनूठी मिसाल की तारीफ कर रहा हर कोई

Unique Wedding Card: श्रीमाधोपुर में एक सरकारी शिक्षक ने अपनी शादी का निमंत्रण पत्र ऐसा छपवाया की हर कोई इस अनूठी मिसाल की तारीफ कर रहा है।

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सीकर

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Akshita Deora

Apr 24, 2026

Wedding Card

संस्कृत में छपे शादी के कार्ड की फोटो: पत्रिका

Wedding Card In Sanskrit Language: जहां आधुनिकता के दौर में निमंत्रण पत्रों में नई डिजाइनों और अंग्रेजी शब्दों का चलन बढ़ रहा है, वहीं श्रीमाधोपुर क्षेत्र के एक संस्कृत शिक्षक ने अपनी शादी का निमंत्रण पत्र संस्कृत भाषा में छपवाकर मातृसंस्कृति और भाषा सम्मान का प्रेरक संदेश दिया है। यह पहल अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है और सोशल मीडिया पर भी कार्ड वायरल हो रहा है। हर कोई इसकी तारीफ करता नजर आ रहा है।

सरकारी शिक्षक है दूल्हा

श्रीमाधोपुर क्षेत्र के नालोट संस्कृत विद्यालय में कार्यरत सरकारी शिक्षक रलावता निवासी दौलतराम शर्मा ने अपनी शादी का निमंत्रण पत्र संस्कृत भाषा में छपवाकर एक सराहनीय पहल की है। उन्होंने यह कदम संस्कृत भाषा के प्रति सम्मान प्रकट करने, आमजन को इससे जोडऩे और दैनिक जीवन में इसके प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया है।

दौलतराम शर्मा का विवाह 29 अप्रेल को आयोजित होगा। विवाह समारोह के लिए छपवाए गए निमंत्रण पत्र में सभी कार्यक्रमों का उल्लेख पूरी तरह संस्कृत भाषा में किया गया है, जिससे कार्ड आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

निमंत्रण पत्र में विवाह कार्यक्रमों के लिए विनायक स्थापनम:, वरयात्रा प्रस्थान:, पाणिग्रहण संस्कार, प्रीतिभोजनम: जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है। वहीं आमंत्रण और स्वागत भाव व्यक्त करने के लिए निमंत्रणस्थलम:, जामातार:, मातामहपक्ष:, स्वागतोत्सुक: अस्मदीय:, कुटुम्ब:, वयमपि प्रतीक्षामहे, भवतां स्वागताय जैसे संस्कृत शब्दों को शामिल किया गया है।

‘कुंकुं पतरी’ भी लोकप्रिय

वहीं झुंझुनूं सहित शेखावाटी क्षेत्र में इन दिनों राजस्थानी भाषा में छपे शादी के निमंत्रण पत्र, जिन्हें ‘कुंकुं पतरी’ कहा जाता है, तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। आधुनिक दौर में जहां अंग्रेजी और हिंदी कार्ड्स का चलन बढ़ा था, वहीं अब लोग अपनी जड़ों और मायड़ भाषा की ओर लौटते नजर आ रहे हैं। इन कार्ड्स में ‘थारे आवण सूं म्हारो आंगणो महक उठसी’ जैसे आत्मीय शब्द अपनत्व का खास एहसास देते हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह सिर्फ निमंत्रण नहीं बल्कि संस्कृति और पहचान का प्रतीक है। इसका असर नई पीढ़ी पर भी दिख रहा है, जो इन शब्दों के अर्थ जानने के प्रति उत्सुक है। प्रिंटिंग प्रेस संचालकों के मुताबिक, राजस्थानी भाषा के कार्ड्स की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर युवाओं में इसे लेकर खास उत्साह देखा जा रहा है।

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