
विष्णु करेंगे शयन...अब शिव संभालेंगे सत्ता
सीकर. सृष्टि के संचालन की पूर्व निर्धारित प्रक्रिया बदल गई है। सृष्टि का संचालन करने वाले विष्णु अब चार माह तक क्षीरसागर में विश्राम करेंगे। सत्ता का संचालन का दायित्व इस दौरान भगवान शिव के पास रहेगा। देवशयनी एकादशी को भगवान विष्णु का शयन काल माना जाता है। पुराणों के अनुसार इस दिन से भगवान विष्णु चार मास के लिए क्षीरसागर में शयन करते हैं। ये एकादशी आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। इस बार देवशयनी एकादशी 20 जुलाई मंगलवार को मनाई जाएगी। पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि इसी दिन से चातुर्मास प्रारंभ हो जाते हैं और अगले चार महीनों तक किसी भी वैवाहिक कार्य पर रोक लग जाती है।
देवशयनी एकादशी का महत्व
पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं। इसलिए इस मास को चतुर्मास भी कहा जाता है। इस दिन से भगवान शिव संसार का संचालन करते हैं। इस दिन से सभी मांगलिक कार्य करना वर्जित हो जाता है। इसके बाद देवउठनी एकादशी से सभी मांगलिक कार्य फिर से आरंभ हो जाते हैं।
शालिग्राम की पूजा करना होता है शुभ
देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु की पूजा करने का विशेष महत्व है। क्योंकि एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दिन शालिग्राम की पूजा करना भी शुभ माना जाता है. देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ ही शालिग्राम जी की पूजा भी कर पंचामृत से स्नान करा कर भोग लगाया जाता है।
इन चीजों का करें दान
देवशयनी एकादशी पर व्रत करने से जीवन की सभी परेशानियां समाप्त हो जाती हैं। इस दिन दान करने का भी विशेष महत्व है. इस दिन पीली वस्तु दान करना या लक्ष्मी-नारायण के मंदिर में तुलसी के पौधे का दान करना भी शुभ माना जाता है. इसके अलावा, केले के वृक्ष की पूजा करना भी अत्यधिक महत्वपूर्ण माना जाता है. देवशयनी एकादशी के दिन ऊं नमो भगवते वासुदेवाय नम: मंत्र का जाप करें या विष्णु सहस्त्र नामावली का पाठ करें। इसके अलावा, विष्णु चालीसा का पाठ करें।
Published on:
19 Jul 2021 08:28 pm
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