
वक्री शनि लाएगा उतार चढ़ाव
सीकर. न्याय के देवता शनि देव 30 अप्रेल से धनु राशि में वक्री हो जाएंगे। यह स्थिति 18 सितंबर तक रहेगी। शनि देव चार माह 18 दिन तक वक्री रहेंगे। शनि के वक्रीय होने पर इसकी क्रूरता बढ़ेगी। इसका मौसम और देश की राजनीति में भी बड़ा उतार चढ़ाव देखने के मिलेगा। तेज गर्मी के इस मौसम में अग्निकांड, चक्रवात, आंधी-तूफान से जन-धन हानि हो सकती है।
पंडित दिनेश मिश्रा ने बताया कि कुंडली मे शनि योग कारक ग्रह है तो वह अच्छे फल देगा। शनि के वक्रीय होने से उन्हें कोई नुकसान नहीं होगा। शनि देव कर्मफल दाता हैं और वे कर्मों के आधार पर मनुष्य को फल देता है। शनि देव के वक्री होने पर चंद्र राशि के अनुसार विभिन्न राशियों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ेगा। शनि देव की उपासना से भक्तों को लाभ मिलेगा।
शनि अमावस्या पर बनेगा त्रिग्रही योग
सीकर. वैशाख मास की शनि अमावस्या इस बार चार मई को है। शनि अमावस्या को धर्म और तीर्थ पर स्नान का बड़ा महत्व है। इस संवत का राजा भी शनि है, अत: दान धर्म मे विशेष फलदायी होंगे। वैशाख मास की अमावस्या तिथि शनिवार के दिन होने से इसका अधिक महत्व हो गया है। ऐसी मान्यता है कि वैशाखी शनि अमावस्या के दिन शनिदेव की विशेष आराधना करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। इस दिन पितृ दोष से पीडि़त व्यक्ति कुछ बहुत ही सरल उपाय करे तो लाभ होता है।
शनि का तेल से अभिषेक
शनि देवता को प्रसन्न करने के कई तरीके बताए गए हैं। मान्यता के अनुसार शनि के तांत्रिक बीज मंत्र का जाप और शनि स्रोत का पाठ करने से लाभ मिलेगा। इसी तरह शनिचरी अमावस्या पर चार मई के दिन शाम को सरसों के तेल से शनि देव का अभिषेक करना शनि की शांति का सर्वश्रेष्ठ उपाय है। नित्य भैरव नामावली का पाठ व हनुमान चालीसा के पाठ करने से भी मन को शांति व प्रसन्नता मिलेगी।
पितृदोष से मुक्ति
कहा जाता है कि वैशाखी शनैश्चरी अमावस्या के दिन जो भी व्यक्ति अपने पूर्वज पितरों का श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करने से पितृ दोष या अन्य दोषों की पीड़ा दूर होती है। शनि का पूजन और इस दिन दान करने से अद्भूत लाभ होता है एवं शनिदेव की कृपा से पूर्वज पितरों का उद्धार बड़ी ही सहजता से हो जाता है।
राशियों पर यह रहेगा प्रभाव
मेष: आध्यात्मिक विषयों में रुचि बढ़ेगी।
वृष: आकस्मिक कष्ट एवं व्यर्थ के विवादों से बचें।
मिथुन: व्यापार में वृद्धि और राजनीतिक लाभ।
कर्क: शिक्षा में लक्ष्य की प्राप्ति।
सिंह: व्यापार में वृद्धि लंबित कार्य पूर्ण होंगे।
कन्या: गृह क्लेश, शारीरिक कष्ट।
तुला: मित्रों से सहयोग, राजनीति लाभ की प्राप्ति।
वृश्चिक: अवांछित स्थान परिवर्तन।
धनु: मानसिक तनाव बढ़ेगा।
मकर: व्यय की अधिकता रहेगी।
कुंभ: आय के साधनों में वृद्धि।
मीन: कार्य क्षेत्र में उन्नति।
Published on:
30 Apr 2019 08:20 pm
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