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पदक लाए हो तो हरियाणा जाओ, राजस्थान में नहीं है इनकी कोई वैल्यू

ओलम्पिक में पदक विजेताओं को हरियाणा में पुलिस उपाधीक्षक या प्रथम श्रेणी की अन्य नौकरी दी जाती है। एशियन या राष्ट्रमण्डल खेलों में स्वर्ण पदक विजेता को पुलिस उपाधीक्षक या प्रथम श्रेणी की अन्य नौकरी दी जाती है।

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dinesh rathore

Feb 22, 2017

अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में पदक जीतने वाले खिलाडिय़ों को हरियाणा में जहां पुलिस उप अधीक्षक सहित दूसरे विभागों में अधिकारी की नौकरी बिना किसी परीक्षा के दे दी जाती है, वहीं राजस्थान में बाबू बनने के लिए भी कई तरह की परीक्षाओं से गुजरना पड़ रहा है। ओलम्पिक में पदक विजेताओं को हरियाणा में पुलिस उपाधीक्षक या प्रथम श्रेणी की अन्य नौकरी दी जाती है। एशियन या राष्ट्रमण्डल खेलों में स्वर्ण पदक विजेता को पुलिस उपाधीक्षक या प्रथम श्रेणी की अन्य नौकरी दी जाती है। रजत पदक जीतने पर निरीक्षक तथा कांस्य पदक पर उप निरीक्षक की नौकरी दी जा रही है। इसके अलावा सरकारी नौकरियों की भर्ती में पांच प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है, जबकि राजस्थान में मात्र दो प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। पहले जिन खिलाडिय़ों ने पदक जीता है, उनको भी अभी तक नौकरी नहीं मिली है।

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इनको अभी नहीं दी नौकरी

राज्य सरकार ने अभी तक पैरा ओलम्पिक में विश्व रिकॉर्ड के साथ दो बार स्वर्ण पदक विजेता देवेन्द्र झाझडिय़ा, एशियन गेम में पदक विजेता बजरंग लाल ताखर, कांग्रेस में शामिल होने से पहले राष्ट्रमण्डल खेलों की विजेता कृष्णा पूनिया, एशियन गेम की विजेता शगुन चौधरी, मंजूबाला स्वामी, अपूर्वी चंदेल, कबड्डी खिलाड़ी सुमित्रा शर्मा, विश्व चैम्पियनशिप व एशियन गेम में पदक विजेता रजन चौहान सहित अनेक अंतरराष्ट्रीय खिलाडिय़ों को अभी राज्य सरकार ने नौकरी नहीं दी है। हालांकि अनेक खिलाड़ी केन्द्र सरकार के विभागों में लगे हुए हैं, लेकिन राज्य में उनको तवज्जो नहीं दी जा रही।

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खिलाड़ी के पास पढ़ाई का नहीं होता समय...

खिलाड़ी जब विश्व स्तर की प्रतियोगिता की तैयारी करता है तो उसका पूरा ध्यान खेलों की तरफ ही रहता है। उसका पूरा समय खुद के खेल की तैयारी, शारीरिक फिटनेस, डाइट, प्रशिक्षण व अन्य कार्यों में गुजर जाता है। वह सामाजिक कार्यों में भी शामिल नहीं हो सकता। घर से भी दूर रहना पड़ता है। दिन-रात कड़ी मेहनत करने के बाद उसे पदक मिल पाता है। उसके पास पढ़ाई का समय नहीं होता है। हरियाणा में पदक जीतते ही बिना किसी परीक्षा के अधिकारी बना दिया जाता है। जबकि राजस्थान में पहले आवेदन करो, लिखित परीक्षा दो, फिजीकल फिटनेस में उत्तीर्ण हो, साक्षात्कार दो तब जाकर छोटी-मोटी नौकरी मिल सकती है। हर पार्टी को अपने एजेंडे में नौकरी देने का वादा करना चाहिए।

मंजूबाला स्वामी, रजत पदक विजेता, एशियन खेल

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