
सीकर जिले में वायरल जनित बीमारियां ने पैर पसार लिए हैं। मेडिसिन ओपीडी में 40 प्रतिशत से ज्यादा मरीज इंफेक्टिव डायरिया, पीलिया के मरीज आ रहे हैं। दवाओं की दुकानों पर जिंक टेबलेट, ओआरएस की खपत बढ़ गई है। कल्याण अस्पताल के मेल व फीमेल मेडिकल वार्ड में करीब 15 प्रतिशत मरीज वायरल हिपेटाइटिस, इंफेक्टिव डायरिया व पीलिया के मरीज भर्ती है। चिकित्सकों ने बताया कि तापमान में ऐसा उतार-चढ़ाव जारी रहने पर आगामी दिनों डेंगू व मलेरिया के मरीज आने लगेंगे।
चिकित्सकों के अनुसार दिन में गर्मी और रात में मामूली ठंडक के कारण वायरस और मच्छरों के पनपने के लिए मौसम अनुकूल बन गया है। वहीं खान-पान की सामग्री में कुछ समय बाद ही बैक्टिरिया या वायरस बनने लगते हैं जो उल्टी दस्त का कारण बनता है। समय पर चिकित्सक को नहीं दिखाने से आंतों में बैक्टिरियल संक्रमण शुरू हो जाता है।
चिकित्सकों के अनुसार स्वाइन फ्लू के लक्षण मौसमी बीमारियों के जैसे होते हैं। आमतौर पर स्वाइन फ्लू के लक्षण हर पांच छह साल बाद म्यूटेंट होकर सक्रिय हो जाता है। ऐसे में सीकर में वर्ष 2015 में स्वाइन फ्लू के काफी मरीज मिले थे। वहीं जिले के तीन ब्लॉक में दो माह में एक दर्जन से ज्यादा डेंगू पॉजिटिव मिल चुके हैं। लेकिन स्वास्थ्य विभाग निजी अस्पताल की महज रिपोर्ट पर इसकी पुष्टि नहीं मानता।
मौसम में बदलाव के कारण पीलिया, डायरिया व उल्टी दस्त के मरीज बढ़ गए हैं। फिलहाल अस्पतालों के वार्डों में करीब 15 प्रशिशत मरीज पीलिया व डायरिया के भर्ती है।
डॉ. मुकेश वर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर, मेडिसिन
गर्मी के सीजन को देखते हुए ग्लुकोज और ओआरएस की खपत बढ़ी है। डायरिया के मरीज बढ़ने से आगामी दिनों में इनकी बिक्री और बढेगी।
संजीव नेहरा, अध्यक्ष सीकर जिला केमिस्ट एसोसिएशन
Published on:
23 Apr 2024 11:46 am
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