
Video: पार्थिव शिवलिंग बना रही महिलाएं
सीकर. श्रीमाधोपुर में भगवान शिव की पूजा का पवित्र माह सावन शुरू हो गया है, तमाम लोग दूर-दराज के जागृत शिवालयों में भगवान की पूजा कर रहे हैं वहीं बहुत से लोग घर पर ही पूजा कर रहे हैं। महामंडलेश्वर ओमकार दास महाराज बताते हैं कि श्रावण मास में पार्थिव शिवलिंग पूजा का बड़ा महत्व है। जो पार्थिव शिवलिंग बनाकर विधिवत पूजन अर्चना करता है, वह दस हजार कल्प तक स्वर्ग में निवास करता है। शिवपुराण में लिखा है कि पार्थिव पूजन सभी दु:खों को दूर करके सभी मनोकामनाएं पूर्ण करता है। यदि प्रति दिन पार्थिव पूजन किया जाए तो इस लोक तथा परलोक में भी अखण्ड शिव भक्ति मिलती है।
महामंडलेश्वर ओमकार दास महाराज ने बताया कि मिट्टी के शिवलिंग को पार्थिव शिवलिंग कहा जाता है। मिट्टी का शिवलिंग गाय के गोबर, गुड़, मक्खन, भस्म, मिट्टी और गंगा जल मिलाकर बनाया जाता है। पार्थिव शिवलिंग बनाते समय इन सभी चीजों को एक में मिला दें और फिर गंगाजल मिलाकर बनाएं। ध्यान रहे मिट्टी का शिवलिंग बनाते समय पवित्र मिट्टी का इस्तेमाल करें। पार्थिव शिवलिंग बनाकर सावन मास में शिवोपासना द्वारा अनिष्ट से अनिष्ट ग्रहों के दुष्प्रभावों का शमन किया जा सकता है। श्रावण मास में पार्थिव शिव उपासना के साथ राशि के स्वामी ग्रह को प्रबल बनाकर शिव कृपा से जीवन में सुख-शांति, समृद्धि सरलतापूर्वक से पाई जा सकती है।
Published on:
14 Jul 2023 09:58 am
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