
जिंदगी की परीक्षा में असफलता से होगा सामना, लेकिन मैदान में डटे रहो
सीकर. जिदंगी में असफलताओं से भी सामना होता है। लेकिन असफलता से हारकर मैदान छोडऩे वाले कभी अपने लक्ष्य पर नहीं पहुंच सकते हैं। लक्ष्य पर पहुंचने के लिए असफलता के बाद भी मैदान मेंं चट्टान की तरह डटकर खड़े रहना होगा। यह कहना है नड़ा का बालाजी सीकर निवासी सरोज गोरा का। उन्होंने राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से आयोजित संस्कृत शिक्षा राजनीति विज्ञान व्याख्याता के परिणाम में तीसरी रैंक हासिल कर सफलता का परचम लहराया है। उन्होंने बताया कि इससे पहले वह व्याख्याता परीक्षा में काफी कम अंकों से चुक गई थी। लेकिन मन में सफलता हासिल करने का जुनून था। इसके लिए वह लगातार डटी रही। इस बार मेहनत को किस्मत का सहारा मिला तो पूरे राजस्थान में सीकर का कद बढ़ा दिया।
2006 में पुलिस में नौकरी, नहीं किया कार्यग्रहण
गोरा ने बताया कि वर्ष 2006 में राजस्थान पुलिस में कांस्टेबल के पद पर चयन हुआ। लेकिन परिजनों के साथ शिक्षकों ने कहा कि आप अच्छा कर सकते हो। इसलिए पुलिस में जाने का मन नहीं बनाया। वर्ष 2007 में शादी होने के बाद पढ़ाई से थोड़ी दूरी हो गई। इस दौरान उन्होंने बीएड की पढ़ाई भी कर ली।
2016 से फिर जुटी तैयारी में
राजस्थान लोक सेवा आयोग की ओर से वर्ष 2016 में प्रथम श्रेणी व्याख्याता भर्ती का विज्ञापन आया। इसके लिए तैयारी से जुट गई। शिक्षक रघुवीर सिंह ने काफी आत्मविश्वास बढ़ाया। लेकिन इस परीक्षा में आठ अंकों से चूक गई। लेकिन हार मानने के बजाय फिर से तैयारी में जुट गई। दुबारा 2018 में विज्ञप्ति आई फिर तैयारी की लेकिन सफलता नहीं मिली। इस बार काफी करीबी अंकों से हार मिली।
शुरूआत से ही शिक्षक बनने का सपना
सरोज ने बताया कि बचपन से ही शिक्षक बनने का सपना था। उन्होंने सफला का श्रेय शिक्षक रघुवीर सिंह, अरविंद भास्कर, पिता गोविंद सिंह गोरा, ससुर डालूराम, शिक्षक जितेन्द्र फेनिन, राजीव बगडिय़ा, गंगाधर ढाका, मनफूल भास्कर, मुकेश गढ़वाल व भागीरथ सोहू को दिया है। विभिन्न संगठनों की ओर से होनहार का स्वागत किया गया।
Published on:
19 Aug 2021 06:44 pm
बड़ी खबरें
View Allसीकर
राजस्थान न्यूज़
ट्रेंडिंग
