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युवा बोले: सब वोट चाहते हैं, लेकिन रोजगार नहीं देना चाहते

विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, मतदान करने वाले आक्रोशित युवा में बेरोजगारी, पेपर आउट, रोजगार भत्ता नहीं मिलने, कोचिंग व दिन रात पढ़ाई के बावजूद समय पर भर्तियां के मामले को लेकर आक्रोश है।

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युवा बोले: सब वोट चाहते हैं, लेकिन रोजगार नहीं देना चाहते

युवा बोले: सब वोट चाहते हैं, लेकिन रोजगार नहीं देना चाहते

विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, वैसे ही अलग-अलग पार्टियां युवाओं को बड़े-बड़े सपने दिखाने लगी है। नौकरियों और बेरोजगार भत्ते के सपने दिखाने के साथ ही युवाओं को अपनी आकर्षक योजनाओं के लालच में फंसाना चाहते हैं। युवाओं और बेरोजगार छात्र-छात्राएं अपनी समस्याओं बेरोजगारी, पेपर आउट, रोजगार भत्ता नहीं मिलने, कोचिंग व दिन रात पढ़ाई के बावजूद समय पर भर्तियां नहीं निकलने की पीड़ा बता रहे हैं। बेरोजगार युवाओं को हर महीने सड़कों पर उतर कर प्रदर्शन करने पड़ते हैं और दिल्ली, यूपी तक नेताओं के पीछे चक्कर काटने पड़ते हैं। ये कहना है बेरोजगार युवाओं का। यही नहीं कॉलेज के छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति नहीं देने के साथ ही बेरोजगार भत्ते में भी कार्य करने के अड़ंगे लगाने का आरोप लगा रहे हैं।

पेपर आउट होने से युवाओं में आक्रोश

छात्रा साक्षी का कहना है कि राज्य में बेरोजगार युवा बड़ा वोट बैंक है। यही कारण है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दल बेरोजगारों को लुभाने में लगे हुए हैं और सब युवाओं के वोट को साधना चाहते हैं। कांग्रेस सरकार ने भर्तियां तो की लेकिन ज्यादार भर्तियों के पेपर आउट हुए जिससे दिन-रात तैयारी कर रहे युवाओं को नौकरी नहीं मिल सकी है। दोनों ही पार्टियों ने युवाओं के लिए गत पांच साल पहले भी बहुत वादे किए थे लेकिन अंत में युवाओं को धोखा ही मिलता है।

घोषणाएं की, उन्हें पूरा नहीं किया

छात्रा अंशु सैनी सरकार बेरोजगारों को लुभाने के लिए बड़ी-बड़ी घोषणाएं तो कर देती है, लेकिन वे घोषणाएं पूरे पांच साल तक अधूरी ही रहती है। ऐसे में हमें ऐसी सरकार चाहिए तो जो कि युवाओं के वादों पर खरी उतरे और सभी वादे सरकार बनने के दो साल के अंदर ही पूरे करे।

रोजगार मेले महज छलावा

छात्रा आरती ने बताया कि कांग्रेस सरकार ने जगह-जगह कई जिलों में रोजगार मेले लगाए लेकिन वहां से युवाओं को धक्के खाने के अलावा कुछ नहीं मिला। युवाओं को स्किल्स, अच्छी एजुकेशन होने के बाद भी रोजगार मेलों से कोई रोजगार नहीं मिला है। रोजगार मेलों में भारी अव्यवस्थाएं देखने को मिली और आठ से 10 हजार से अधिक की नौकरी नहीं दी गई। रोजगार मेलों के बहाने युवाओं के साथ छालावा किया गया।

पेपर लीक पर मिले सख्त सजा

आर्ट्स कॉलेज कटराथल की छात्रा ललिता का कहना है कि पेपर लीक और भर्तियों में फर्जीवाड़े से युवा हताश हैं। सरकार ने पेपर लीक के लिए कानून तो बना दिए लेकिन कानून के तहत पेपर लीक कर युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले आरोपियों को कठोर सजा नहीं दिलवाई गई।

बेरोजगारी भत्ते के लिए भटकाया

छात्रा स्वाति का कहना है कि छात्र-छात्राओं को बेरोजगार भत्ता वर्षों से दिया जा रहा है। हर सरकार बेरोजगारों को यह भत्ता देती आ रही है लेकिन अशोक गहलोत सरकार ने इस बार बेरोजगारों को विभिन्न विभागों में काम करवाया, इसके बावजूद भी पूरा भत्ता नहीं दिया गया। बेरोजगारों को भत्ते के लिए जगह-जगह भटकाया गया, विभागों में जाने के बाद भी उपस्थिति पूरी नहीं भेजी गई थी।

रोजगार व निशुल्क कोचिंग सपना

छात्रा रौनक ने बताया कि युवाओं के लिए रोजगार और निशुल्क कोचिंग की व्यवस्था करनी चाहिए थी, सरकार ने युवाओं को सपने तो बहुत दिखाए थे लेकिन युवाओं को रोजगार व नौकरी मिलने के बजाय बेरोजगारी का दंश झेलना पड़ रहा है। बेरोजगार पूरे पांच साल कोचिंग्स में तैयारी करते रहे और जब एग्जाम आए तो पेपर आउट हो गए।

हाथ आई सिर्फ निराशा

आर्ट्स कॉलेज की छात्रा अंजना का कहना है कि राज्य सरकार ने पेपर आउट करने वाले आरोपियों को गिरफ्तार करने, कड़े कानून बनाने वादे किए। लेकिन एक के बाद एक लगातार अधिकांश परीक्षाओं के पेपर आउट होते गए। इससे लाखों रुपए खर्च कर तैयारी कर रहे युवाओं के हाथ निराश लगी। सरकार ने ज्यादातर भर्तियां भी चुनाव के एक साल पहले की है।

नए कॉलेजों में कोई सुविधाएं नहीं

छात्रा काजल छात्रा ने कहा कि सरकार ने हर तहसील में कॉलेज खोल दिए हैं लेकिन उनमें आधारभूत संसाधन व सुविधाओं का अभाव है। ज्यादातर नए कॉलेज तीन से चार लेक्चरर के भरोसे चल रहे हैं। भवन, स्टाफ, फर्नीचर, खेल मैदान और स्टाफ आदि नहीं है। इसके साथ ही छात्रा ज्योतिका, प्रेमलता, अंजू, मनीषा, बबीता, प्रियंका, खुशी, चिंटू ने भी अपने सुुझाव दिए।