
NCL makes arrangements for treatment of corona infection in Singrauli
सिंगरौली. एनसीएल की झिंगुरदा खदान को बंद करने का प्रस्ताव फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। इस खदान में अभी अगले 4 वर्ष तक कोयला का खनन किया जाएगा। एनसीएल ने यह निर्णय सीएमपीडीआइ की एक रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।
सेंट्रल माइन प्लानिंग एंड डिजाइन इंस्टीट्यूट (सीएमपीडीआइ) की ओर से किए गए सर्वे में बताया गया है कि विशेष तकनीकी का प्रयोग कर अभी झिंगुरदा खदान से कम से कम 10 मिलियन टन कोयला निकाला जा सकता है। सीएमपीडीआइ के रिपोर्ट व सुझाव को संज्ञान में लेते हुए एनसीएल के आफीसर्स बोर्ड ने खदान में कोयला निकालने का निर्णय लिया है।
अधिकारियों का मानना है कि कोयला की कमी के इस दौर में इस खदान को चालू रखना कई मायने से लाभकारी होगा। कोयला कंपनी की ओर से इसको लेकर खदान में कार्य शुरू कर दिया गया है। बता दें कि झिंगुरदा एनसीएल की सबसे पुरानी कोयला खदान है। इसमें कोयला स्टॉक खत्म होने का हवाला देते हुए इसे बंद करने की योजना थी।
2 से ढाई एमटी प्रतिवर्ष उत्पादन
एनसीएल की ओर से बनाई गई योजना के मुताबिक झिंगुरदा खदान से पूर्व की भांति दो से ढाई मिलियन टन कोयला प्रतिवर्ष निकाला जाएगा। इस तरह से अनुमान लगाया गया है कि अभी यह खदान कम से कम 4 वर्ष तक चालू रहेगी। इससे कोयला प्राप्त होने के साथ ही खदान में कार्य करने वाले श्रमिकों की रोजी-रोटी भी चलती रहेगी।
करीब 500 को मिला है काम
झिंगुरदा खदान में वर्तमान में करीब 500 मानव श्रम कार्य कर रहे हैं। कंपनी के अधिकारियों की माने तो खदान बंद होने की स्थिति में भारी संख्या में श्रमिकों के बेरोजगार होने की संभावना थी, लेकिन अब खदान अगले 4 वर्ष तक चालू रहेगी और श्रमिकों का रोजगार बरकरार रहेगा। गौरतलब है कि यह खदान वर्ष 1965 से संचालित है।
Published on:
21 Dec 2021 11:41 pm
बड़ी खबरें
View Allसिंगरौली
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
