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‘प्रभावित गांव के हर खेत पर जाए राजस्व अमला, नहीं छूटे कोई किसान’

कमिश्नर ने देखा ओलावृष्टि से फसल की तबाही का हाल, बोले मिलेगा मुआवजा ...

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Commissioner saw devastation of crop due to hailstorm

Commissioner saw devastation of crop due to hailstorm

सिंगरौली. प्रभावित क्षेत्र के सभी खेतों पर मैदानी अमला भौतिक रूप से जाए और नुकसान का आकलन करे। कोई भी खेत छूटना नहीं चाहिए। ओलावृष्टि से तबाह हुई फसल का हाल जानने शुक्रवार को चितरंगी पहुंचे कमिश्नर अनिल सुचारी ने राजस्व विभाग के अधिकारियों को यह निर्देश दिया। वहां उन्होंने दुधमनिया सर्किल में किसानों की तबाह हुई फसल को देखा और साथ मौजूद अधिकारियों को जल्द से जल्द सर्वे कार्य पूरा कराते हुए नुकसान की रिपोर्ट देने को कहा। साथ में उपस्थित कलेक्टर अरूण कुमार परमार ने फसल नुकसान को लेकर अब तक के आकलन की जानकारी कमिश्नर को दी।

फसल नुकसान की स्थिति का जायजा लेने भ्रमण पर आए कमिश्नर सीधी जिले के बाद सीधे चितरंगी के दुधमनिया सर्किल में पहुंचे। वहां उन्होंने दुघमनिया, पोड़ी -3 व बरगवां गांव के खेतों को देखा। दो दिन पहले हुई ओलावृष्टि में इन तीनों में गांवों में सबसे ज्यादा फसल का नुकसान हुआ है। कई किसानों के खेत तो पूरी तरह से तबाह हो गए हैं। किसानों की गेहूं के अलावा राई, मटर व जौ की फसल को जबरदस्त नुकसान पहुंचा है। अरहर की फसल भी प्रभावित हुई है। भ्रमण के दौरान कमिश्नर के साथ कलेक्टर के अलावा एसडीएम विकास सिंह, तहसीलदार एससी परते व नायब तहसीलदार जान्हवी शुक्ला सहित अन्य अधिकारी उपिस्थत रहे।

दो दिन में सर्वे पूरा करने का निर्देश

कमिश्नर ने राजस्व अधिकारियों से कहा कि दो दिनों में फसल नुकसान का सर्वे कार्य पूरा कराएं और उसके बाद किसानों के नाम व फसल नुकसान से संबंधित सूची ग्राम पंचायत में दावा-आपत्ति प्राप्त करने के लिए चस्पा करें। कहा कि दावा-आपत्तियों का निराकरण कर जल्द से जल्द फसल नुकसान की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी, ताकि मुआवजा वितरण के लिए आगे की कार्यवाही की जाए। गौरतलब है कि इन तीन गांवों में किसानों की 40 फीसदी से लेकर 90 फीसदी तक फसल तबाह हुई है।

आज माड़ा तहसील का करेंगे रूख

कमिश्नर शनिवार को जिले में अधिकारियों के साथ बैठक कर मुख्यमंत्री बहना योजना में केवाइसी सहित अन्य योजनाओं की समीक्षा करेंगे। साथ ही उनके द्वारा माड़ा तहसील का भी भ्रमण किया जाएगा। इस तहसील में भी ढोंढीटोला, मकरोहर, झांझीटोला सहित अन्य कई गांवों में ओलावृष्टि से फसल प्रभावित हुई है। इन गांवों में गेहूं के साथ राई, मटर और अरहर की फसल तबाह हुई है। चितरंगी की तुलना में यहां नुकसान कम माना जा रहा है।