
Demand to Bagdara sanctuary, ban remove on purchase and sale of land
सिंगरौली. चितरंगी तहसील के बगदरा क्षेत्र को अभ्यारण से मुक्त करने की मांग की जा रही है। दलील है कि एक ओर जहां बिना प्रक्रिया पूरी किए अनावश्यक रूप से बगदरा को अभ्यारण की श्रेणी में रखा है। वहीं दूसरी ओर जमीन की खरीद व बिक्री पर प्रतिबंध लगाने जैसे आदेश जारी किए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र का 40 हजार से अधिक परिवार प्रभावित हो रहा है। बगदरा को अभ्यारण से मुक्त करने और जमीन की रजिस्ट्री पर लगे प्रतिबंध को हटाने की मांग को लेकर जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने अतिरिक्त प्रमुख सचिव मप्र. शासन के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। उपाध्यक्ष अर्चना नागेंद्र सिंह के साथ कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी उपिस्थत रहे।
कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन के मुताबिक करीब 45 वर्ष पहले बगदरा को काले हिरन के लिए अभ्यारण बनाने की घोषणा की गई थी, लेकिन अभ्यारण के बावत सभी आवश्यक प्रक्रिया आज तक पूरी नहीं की जा सकी है। यह बात और है कि चार दशक बाद डेढ़ वर्ष पहले तत्कालीन कलेक्टर राजीव रंजन मीना ने बगदरा में जमीन की रजिस्ट्री पर प्रतिबंध लगा दिया। कहना है कि इससे स्थानीय किसानों को कई तरह की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। किसान अपनी जमीन का किसी भी रूप में उपयोग नहीं कर पा रहा है। मांग है कि बगदरा को अभ्यारण से मुक्त किया जाए, ताकि किसान अपनी जमीन का जरूरत के मुताबिक उपयोग कर सकें। ज्ञापन सौंपने के दौरान उपाध्यक्ष के अलावा कांग्रेस के शहर अध्यक्ष अरविंद सिंह चंदेल, ग्रामीण अध्यक्ष ज्ञानेंद्र द्विवेदी, प्रदेश सचिव अमित द्विवेदी, मधु शर्मा सहित अन्य पार्टी पदाधिकारी उपिस्थत रहे।
अभ्यारण में शामिल है 23 ग्राम पंचायत
ज्ञापन के मुताबिक बगदरा क्षेत्र की 23 ग्राम पंचायत अभ्यारण में शामिल किया गया है। इन ग्राम पंचायतों में कुल 68 गांव और इनमें 40 हजार परिवार हैं। बताया गया कि लगभग सभी परिवार अभ्यारण में लगे प्रतिबंध के चलते प्रभावित है। ज्ञापन के जरिए प्रतिबंध हटाने की मांग की गई है। साथ ही कहा गया कि शासन व प्रशासन की ओर से प्रतिबंध नहीं हटाया गया तो न्यायालय में जनहित याचिका दायर की जाएगी।
Published on:
08 Aug 2023 11:03 pm
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