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HEALTH: बेपटरी हुई स्वास्थ्य व्यवस्था, मर रहे लोग फिर भी महकमा अंजान

जिला अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य केन्दों तक यहीं हालत है। लोग डायरिया और मलेरिया से मर रहे हैं, उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सक स्वास्थ्य केन्द्रों से नदारत हैं। शव का समय पर पोस्टमार्टम नहीं हो पा रहा है।

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Suresh Kumar Mishra

Sep 19, 2016

sigrauli news

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सिंगरौली
जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था के बुरे हालत हैं, जिला अस्पताल से लेकर स्वास्थ्य केन्दों तक यहीं हालत है। लोग डायरिया और मलेरिया से मर रहे हैं, उन्हें उचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। चिकित्सक स्वास्थ्य केन्द्रों से नदारत हैं। शव का समय पर पोस्टमार्टम नहीं हो पा रहा है। दुष्कर्म पीडि़ता का मेडिकल परीक्षण नहीं हो पा रहा है।


जिले में डायरिया महामारी का रूप ले रही है। गांव-गांव में लोग उल्टी दस्त से पीडि़त हैं। गांवों में डायरिया की रोकधाम के लिए न तो दवा दी जा रही है और नहीं मच्छर मारने के लिए छिड़काव किया जा रहा है। देवसर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में शुक्रवार को पोस्टमार्टम के लिए दिन भर मासूम पड़ा रहा। इनता ही नहीं सरई में पोस्टमार्टम के लिए पुलिस एवं परिजन घंटो इंतजार करते रहे। चिकित्सकों की इस मानमानी पर रोक नहीं लग पा रही है। स्वास्थ्य अमला पूरी तरह से बेपटरी हो गया है।


डायरिया से नहीं रुक रहा मौत का सिलसिला

जिले में डायरिया से अब तक करीब 15 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। जबकि सैकड़ों लोग बीमार हुए हैं। अस्पताल में प्रतिदिन उल्टी - दस्त के मरीज भर्ती हो रहे हैं। गांव में गंदा पानी पीकर लोग बीमार हो रहे हैं। शुद्ध एवं स्वच्छ पानी तक की व्यवस्था नहीं की गई। नाली एवं कूपों का गंदा पानी लोग पी रहे हैं।

डायरिया का प्रकोप देवसर के बंधा गांव से शुरू हुआ जो जिले के कई हिस्सों में फैलता जा रहा है। बीमार होने के बाद जब लोगों की मौत हो जाती है तक स्वास्थ्य अमला वहां कैंप एवं दवाई की व्यवस्था करता है। जिसकी वजह से लोगों की मौत हो रही है।



मलेरिया से निपटने इंतजाम नहीं

मलेरिया से निपटने भी स्वास्थ्य विभाग के पास पर्याप्त इंतजाम नहीं है। जिले में डेंगू एवं चिकनगुनिया के मच्छर एवं लार्वा मिलने के बाद भी स्वास्थ्य अमला लापरवाह बना हुए हैं। मच्छर की दवा का छिड़काव तक नहीं हो पा रहा है। ऐसे में डेगू और चिकनगुनिया का भी खतरा बढ़ता जा रहा है।

आलम यह है कि मलेरिया विभाग के पास पर्याप्त साधन ही नहीं हैं, जिससे मच्छर की दवा का छिड़काव किया जा सके। वहीं जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को जांच रिपोर्ट के लिए दो दिन का इंतजार करना पड़ रहा है।

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