
Devsar District Panchayat President congress leader Pranav joined BJP
सिंगरौली. विधानसभा चुनाव से पहले विंध्य में भाजपा ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। देवसर जनपद पंचायत अध्यक्ष प्रणव पाठक ने भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ले ली है। भोपाल में प्रदेशाध्यक्ष वीडी शर्मा ने उन्हें सदस्यता दिलाई। कांग्रेस को अलविदा कर उनके भाजपा के शामिल होने की चर्चा राजनीतिक गलियारे में जोरों से है। कांग्रेस पदाधिकारियों से उनकी अनबन पिछले वर्ष जनपद अध्यक्ष चुनाव के दौरान से ही चल रही थी।
जनपद अध्यक्ष प्रणव का राजनीतिक कॅरियर बहुत लंबा नहीं है। हालांकि वे छात्र जीवन से ही बतौर छात्रनेता सक्रिय रहे। उनके पिता स्व. कौशलेंद्र पाठक व बाबा स्व. लक्ष्मी कांत पाठक कांग्रेस से जुड़े रहे, लेकिन उन्हें संघ की गतिविधियां शुरू से ही प्रभावित करती रहीं। यही वजह है कि छात्र जीवन में वे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के सदस्य रहे। आखिर में उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया।
बाबा कांग्रेस से रहे विधायक
प्रणव पाठक का राजनीतिक कॅरियर भले ही लंबा न हो, लेकिन राजनीति का क्षेत्र उन्हें विरासत में मिला है। उनके बाबा स्व. लक्ष्मी कांत पाठक कांग्रेस के सदस्य रहते हुए देवसर से ही वर्ष 1962 से 1967 तक विधायक रहे। जबकि पिता स्व. कौशलेंद्र पाठक जिला पंचायत सदस्य व नौढिय़ा ग्राम पंचायत के दो बार सरपंच रहे। पिता के 3 सितंबर 2017 में निधन के बाद प्रणव बतौर कांग्रेस कार्यकर्ता राजनीति में सक्रिय हुए और पिछले वर्ष जिला पंचायत सदस्य बनने के बाद अध्यक्ष बने।
अध्यक्ष बनने के बाद पहुंचे थे भाजपा कार्यालय
प्रणव के जनपद पंचायत अध्यक्ष बनने के ठीक बाद उनके भाजपा में शामिल होने का मामला प्रकाश में आया था। भाजपा नेता व बड़े पिता विश्वमित्र पाठक के साथ वे भाजपा कार्यालय पहुंचे थे और तत्कालीन जिलाध्यक्ष वीरेंद्र गोयल ने उन्हें माला पहनाया था। उसके बाद उनके भाजपा में शामिल होने की बात सामने आई थी। इस पर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी सोशल मीडिया पर उन्हें बधाई दी थी, लेकिन बाद में प्रणव ने भाजपा में शामिल होने की बात का खंडन किया था।
जनपद अध्यक्ष चुनाव से ही शुरू हुई अनबन
प्रणव की कांग्रेस नेताओं से अनबन जनपद पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव से शुरू हो गई थी। प्रणव द्वारा अध्यक्ष पद की दावेदारी करने के बाद कांग्रेस के वर्तमान जिलाध्यक्ष ग्रामीण ज्ञानेंद्र द्विवेदी के नाती धु्रवेंद्रनाथ चतुर्वेदी भी मैदान में आ गए। हालांकि प्रणव ने एक मत से अध्यक्ष पद पर जीत हासिल कर लिया, लेकिन बयानबाजी का दौर उसी समय से शुरू हो गया। प्रणव ने 16 मई को देवसर में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा का आरोप लगाया था। इसके लिए उन्होंने सिहावल विधायक कमलेश्वर पटेल को जिम्मेदार ठहराया था।
Published on:
23 Aug 2023 10:25 pm
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