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साहब मैं जिंदा हूं …..मेरे साथ धोखा हुआ

एमपी के इस जिले में अजीब मामला सामने आया

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In Singrauli, revenue proposal to transfer varisana by land owner dead

In Singrauli, revenue proposal to transfer varisana by land owner dead

सिंगरौली. साहब मैं जिंदा हूं, दस्तावेज में मृत दिखा कर मेरी संपत्ति संबंधित वारिसाना नामांतरण का प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। बदहवास हालत में नायाब तहसीलदार के सामने पहुंचे खम्हरियां गांव के रहवासी लल्ला राम पाण्डेय यह कहा तो अधिकारी भी भौचक रह गए। बात लल्ला राम के साथ हुए अजीबोगरीब वाकए की कर रहे हैं।

लल्लाराम पिता चंद्रमनि के जीवित रहते उन्हें पटवारी ने न केवल दस्तावेजों में मृतक करार दे दिया। बल्कि वारिसाना नामांतरण का प्रकरण भी तैयार कर लिया। पटवारी की आइडी से हुए इस गैरजिम्मेदराना हरकत की खबर उन्हें तब हुई जब दो दिन पहले 15 नवंबर को उनके घर वारिसाना नामांतरण के मसले की नोटिस पहुंची।

घर वालों के नाम पहुंची नोटिस को लल्लाराम ने देखा तो उनके पैरों तले जमीन ही खिसक गई। उन्होंने बताया कि नोटिस में उन्हें मृतक करार देते हुए उनकी जायदाद को किसी चिट्टू व बिट्टू के नाम नामांतरित किए जाने संबंधित प्रक्रिया का जिक्र था। चिट्टू व बिट्टू को उनकी बेटी के रूप में दर्शाया गया था। जबकि पीडि़त का कहना है कि उनकी बेटियों का नाम कुछ और है और वह शादीशुदा हैं। नामांतरण में उनके बेटे का नाम नहीं है।

पीडि़त ने बताया कि नोटिस मिलने के बाद उनकी धड़कन बढ़ गई। उनके साथ पूरा परिवार परेशान हो गया। दूसरे दिन मंगलवार को वह तहसील कार्यालय पहुंचे और नायब तहसीलदार कुनाल राउत से बोले साहब मैं लल्ला राम पाण्डेय अभी जिंदा हूं और दस्तावेज में मृत दर्शा दिया गया। उन्होंने नायब तहसीलदार को पूरी जानकारी दी।

खुद अचंभित नायब तहसीलदार ने पटवारी को तत्काल तलब किया तो पटवारी ने इससे अज्ञानता जाहिर की। यह बात और है कि सारी प्रक्रिया हल्का पटवारी संजय मुडिय़ा की आइडी से ही पूरी की हुई बताई गई है। फिलहाल नायब तहसीलदार ने पटवारी को जमकर फटकार लगाई और आवश्यक दस्तावेज देते हुए तत्काल संशोधन कराया।

दस्तावेज में संशोधन और वारिसाना नामांतरण की प्रक्रिया निरस्त होने के बाद परेशान लल्लाराम को मानसिक तौर पर थोड़ी राहत तो मिली, लेकिन अभी वह यह जानने की कोशिश में लगे हैं कि आखिरी यह हुआ कैसे। क्योंकि वारिसाना नामांतरण की प्रक्रिया से संबंधित फाइल में न ही उनके मृत्यु का प्रमाणपत्र था और न ही कोई दूसरे आवश्यक दस्तावेज। इसके बावजूद नामांतरण के लिए नोटिस जारी हो गई। वह चिट्ट व बिट्टू नाम की पड़ताल में भी जुटे हैं।

डेढ़ वर्ष पहले दर्ज किया गया मृत
वारिसाना नामांतरण की प्रक्रिया को निरस्त करने संबंधित जारी आदेश के मुताबिक लल्ला राम को दस्तावेज में 30 मई 2020 को मृत दर्ज किया गया। यह बात और है कि पीडि़त को इसकी करीब डेढ़ वर्ष तक भनक नहीं लगी। नामांतरण की नोटिस घर नहीं पहुंचती तो वह राजस्व दस्तावेजों में हुई हेराफेरी से अनजान रहते। गौरतलब है कि पीडि़त के साथ यह वाकया तब हुआ है, जब वह पढ़े लिखे और जिला कांग्रेस कमेटी में उपाध्यक्ष हैं।