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उत्कृष्ट संस्थानों में प्रवेश की चाहत, छात्र पहुंच गए कोटा-भोपाल

इंजीनियरिंग व मेडिकल पाठ्यक्रम की पढ़ाई में रुचि, बीए जैसे पाठ्यक्रमों में रुझान कम ...

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Interest in studying engineering-medical courses, no in BA

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सिंगरौली. जिले में संचालित शासकीय कॉलेजों में आधी से अधिक सीट खाली रह गई है। इसकी मुख्य वजह छात्र-छात्राओं में उत्कृष्ट संस्थानों में प्रवेश की चाहत है। हायर सेकंडरी की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले आधे से अधिक छात्र-छात्राओं का रुझान बीए, बीएससी व बीकॉम न होकर इंजीनियरिंग व मेडिकल जैसे अन्य पाठ्यक्रमों की पढ़ाई की ओर होता है।

साथ ही बीए, बीएससी व बीकॉम की पढ़ाई में रुचि लेने वाले आधे से अधिक छात्र उत्कृष्ट संस्थान का चयन करते हैं और वह रीवा सहित दूसरे शहरों की ओर चले जाते हैं। यही वजह है कि यहां निजी की बात तो दूर शासकीय कॉलेजों में भी सीट नहीं भर पा रही है। स्नातक स्तरीय पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए 30 जुलाई तक अंतिम मौका है, लेकिन देवसर को छोडकऱ अभी तक बाकी कॉलेजों में आए आवेदन की संख्या इकाई के अंक तक सीमित है।

तैयारी करने वालों की संख्या भी अधिक
स्कूल प्राचार्यों की माने तो हायर सेकंडरी की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद करीब 5 हजार छात्र-छात्राएं बिना किसी कॉलेज में प्रवेश लिए भोपाल व कोटा जैसे जिलों में जाकर उत्कृष्ट संस्थानों में प्रवेश के लिए नीट व जेइइ की तैयारी में लग गई है। करीब 10 हजार छात्र-छात्राएं वर्तमान सत्र में ही इंजीनियरिंग व मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने की योजना में हैं। करीब 8 हजार छात्र-छात्राएं बीए, बीएससी व बीकॉम में प्रवेश लेते हैं, लेकिन आधे से अधिक का रुझान रीवा जैसे दूसरे जिलों के विश्वविद्यालय व कॉलेज होते हैं।

शासकीय कॉलेजों में साढ़े 3 हजार सीट
जिले में संचालित 10 शासकीय कॉलेजों में करीब साढ़े 3 हजार सीट हैं। हैरत की बात यह है कि जिले में इस वर्ष हायर सेकंडरी की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या 23 हजार से अधिक है। इसके बावजूद कॉलेजों की सीट नहीं भर पा रही है। सीट खाली रह जाने के पीछे एक वजह कॉलेजों में सुविधाओं का अभाव भी माना जा रहा है।

एक्सपर्ट व्यू
वर्तमान में छात्र-छात्राओं का रुझान रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की ओर से है। अभिभावक भी बच्चों को ऐसे पाठ्यक्रमों में प्रवेश दिलाना चाहते हैं, जहां पढ़ाई कर उनका बच्चा आसानी से रोजगार प्राप्त कर सके। पारंपरिक विषयों के प्रति रूझान तेजी के साथ कम हो रहा है। संस्थानों के चयन में भी अभिभावक व छात्र विशेष ध्यान रखते हैं। शासकीय कॉलेजों के प्रति कम होती रुचि व उत्कृष्ट कॉलेजों के प्रति बढ़ते रुझान के पीछे भी रोजगार ही प्रमुख वजह है। बैढऩ व देवसर के अलावा नहीं लगता है कि जिले के एक भी शासकीय कॉलेज की सीट भर पाएगी।
डॉ. एमयू सिद्दीकी, प्राचार्य शासकीय महाविद्यालय बैढऩ।