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निजी महाविद्यालयों के निरीक्षण को अब नहीं आएंगे शासन स्तर के अधिकारी

नवीन मान्यता व मान्यता नवीनीकरण के नियम में फेरबदलअग्रणी प्राचार्य को शासन के प्रतिनिधि के रूप में मिली जिम्मेदारी ....

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Now govt level officer not come to inspect private colleges

Now govt level officer not come to inspect private colleges

सिंगरौली. अशासकीय व अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों के नवीन संकाय व नवीन पाठ्यक्रम की मान्यता संबंधित जांच के लिए अब शासन स्तर के अधिकारी निरीक्षण में नहीं आएंगे। शासन के प्रतिनिधि के रूप में अग्रणी प्राचार्य निरीक्षण के बावत विश्वविद्यालय स्तर पर गठित समिति में शामिल होंगे। उच्च शिक्षा विभाग ने विश्वद्यिालय के साथ अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य को इस बावत निर्देशित किया है। बताया जा रहा है कि इस निर्देश से निजी महाविद्यालयों को कई तरह की सहूलियत मिलेगी।

शासकीय अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. एमयू सिद्दीकी के मुताबिक पूर्व में अशासकीय व अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों में नवीन पाठ्यक्रम व नवीन संकाय के संचालन के बावत निरीक्षण में अब तक शासन स्तर के अधिकारी आते रहे हैं। निरीक्षण उच्च शिक्षा विभाग की ओर अनापत्ति प्रमाणपत्र जारी किए जाने के बाद विश्वविद्यालय स्तर पर गठित समिति द्वारा किया जाता है। इस समिति में विषय विशेषज्ञों के अलावा शासन स्तर का एक अधिकारी शामिल होता था, लेकिन अब समिति में शासन स्तर के अधिकारी के स्थान पर अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य को शामिल किए जाने का निर्देश जारी किया गया है।

लंबित नहीं होगी प्रक्रिया
उच्च शिक्षा विभाग के इस निर्णय से निजी व अनुदान प्राप्त महाविद्यालयों के प्रबंधन को बड़ी राहत मिलेगी। दरअसल समिति में शासन स्तर के अधिकारी के शामिल होने के चलते निरीक्षण कार्य में काफी देर होती थी। इसके चलते विभाग से अनापत्ति मिलने के बाद भी नवीन संकाय या पाठ्यक्रम का संचालन शुरू नहीं हो पाता था। वजह समिति में शामिल अधिकारी पर कई जिलों में निरीक्षण की जिम्मेदारी होती थी। चूंकि अब अग्रणी महाविद्यालय के प्राचार्य हर जिले में होते हैं। इसलिए निरीक्षण विषय विशेषज्ञों की योजना के अनुरूप बिना देर किए हो सकेगा।

महाविद्यालयों ने किया है आवेदन
जिले के आधा दर्जन से अधिक निजी महाविद्यालयों ने विज्ञान संकाय में नवीन पाठ्यक्रमों के लिए आवेदन किया है। इन महाविद्यालयों को इस आदेश से राहत मिलेगी। जिले में छात्र-छात्राओं की जरूरत को देखते हुए प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने से पहले मान्यता मिलना जरूरी है। क्योंकि दो शासकीय महाविद्यालयों को छोड़ दिया जाए तो जिले के 8 शासकीय महाविद्यालयों में भी बीकॉम व बीएससी का पाठ्यक्रम संचालित नहीं है। निजी महाविद्यालयों की िस्थति भी कुछ ऐसी ही है।