
Patrika Janprahari Abhiyan: Restrictions on entry of criminals in politics
सिंगरौली. राजनीति में आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों का प्रवेश, देश के भविष्य व संविधान के लिए संकट है। किसी भी स्थिति में अपराधियों को राजनीति में प्रवेश से रोकना होगा। साथ ही अन्य सेवाओं की भांति राजनीति में भी शैक्षणिक योग्यता निर्धारित किया जाना चाहिए। पत्रिका जनप्रहरी अभियान के तहत ‘स्वच्छ रहे राजनीति’ पर युवाओं व युवतियों ने अपने विचार रखें। साथ ही राजनीति की स्वच्छता के लिए संकल्प भी लिया।
शहर के नवजीवन विहार में संचालित शैक्षणिक संस्थान अमृत विद्यापीठ के बीएड संकाय में आयोजित कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने न केवल मतदाताओं के बल्कि राजनीतिक पार्टियों की जिम्मेदारी पर भी प्रकाश डाला। छात्र-छात्राओं के अलावा संकाय के प्रध्यापकों ने भी बिना किसी प्रलोभन के स्वच्छ छवि के प्रत्याशी को मतदान कर जनप्रतिनिधि चुनने के लिए प्रेरित किया। कहा कि वे इसके लिए दूसरों को भी प्रेरित करें। कार्यक्रम में 50 से अधिक छात्र-छात्राएं शामिल रहीं।
अभियान से जुडऩे कई ने जताई इच्छा
शैक्षणिक संस्थान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान छात्र-छात्राओं ने स्वच्छ राजनीति के लिए पत्रिका की ओर से शुरू अभियान की सराहना की। साथ ही अभियान से जुडऩे की इच्छा जाहिर की। कहा कि वे न केवल स्वयं बल्कि दूसरों को भी राजनीति में आने वाले अपराधियों को नकारने और स्वच्छ छवि के व्यक्ति को जनप्रतिनिधि चुनने के लिए प्रेरित करेंगे।
ये मिले सुझाव
- शिक्षित व प्रतिनिधित्व की क्षमता रखने वाले को जनप्रतिनिधि बनाना चाहिए।
- अपराधियों को नकार कर समाज को संदेश देना होगा कि राजनीति स्वच्छ हो।
- जाति और धर्म में समाज को बांटने वालों की सभाओं का बहिष्कार होना चाहिए।
- नेताओं पर लगे आरोपों की तेजी से जांच कर राजनीति से बाहर करना चाहिए।
- सत्ता के लालची को नहीं, बल्कि समाज की सेवा करने वालों को चुनना होगा।
- जनता को भाषण से छलने वालों को नकारना होगा, काम करने वाले चुने जाएं।
बोले, प्राध्यापक
अपराधी को न मिले टिकट, देना होगा संदेश
पत्रिका का ये अभियान सराहनीय है। जनप्रहरी बनकर आमजन को यह संदेश देना होगा कि अपराधियों को टिकट मिला तो उन्हें नकार दिया जाएगा। समाज से यह संदेश निकलना चाहिए। ऐसा हुआ तो पार्टियां स्वयं अपराधियों को टिकट नहीं देंगी। कमी राजनीतिक पार्टियों में नहीं बल्कि समाज और मतदाताओं में है। विवेक से मतदान के बजाए जाति-पाति के बहकावे में आकर मतदान किया जाता है।
डॉ. डीके शुक्ला, सहायक प्राध्यापक बीएड संकाय।
सत्ता को लोभी नहीं बनने पाए जनप्रतिनिधि
बिना सोचे-समझे किए जा रहे मतदान का नतीजा यह है कि सत्ता के लोभी व्यक्ति जनप्रतिनिधि बन रहे हैं। मंत्री, विधायक व सांसद बनने के बाद ऐसे लोग समाज और जनता का नहीं बल्कि खुद का भला करते हैं। इसलिए चुनाव चाहे ग्राम पंचायत व जनपद पंचायत को या फिर विधानसभा व लोकसभा का, मतदाता को बिना किसी प्रलोभन के स्वच्छ छवि वाले व्यक्ति को मतदान करना चाहिए।
गोपाल जी पाठक, सहायक प्राध्यापक बीएड संकाय।
Published on:
21 Jul 2023 10:14 pm
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