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जल प्रबंधन पर महामारी की छाया, जलाशय व नहर के गेट मरम्मत में देरी के हालात

40 गेट मांग रहे मरम्मत....

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Repairs in Singrauli in April

Repairs in Singrauli in April

सिंगरौली. जिले में सिंचाई जल प्रबंधन व इसकी तैयारी पर कोरोना महामारी की छाया साफ दिखाई दे रही है। समूचे जिले में कई जलाशयों के पानी निकासी गेटों को मरम्मत की जरूरत है तथा इसकी प्रक्रिया अपे्रल माह के आरंभ में शुरू हो जाती है मगर इस बार लाकडाउन के नतीजे में इस प्रक्रिया का अब तक पता नहीं है। वेसे हर वर्ष मानसून से पहले अपे्रल में जलाशयों व नहरों के पानी निकासी गेटों की मरम्मत के लिए जल संसाधन विभाग के स्तर पर प्रक्रिया आरंभ हो जाती है जो मानसून आने तक चलती है मगर इस बार इसमें देरी होना तय दिखाई दे रहा है।जिले में सिंचाई जल प्रबंधन का काम छोटे-बड़े कुल 29 जलाशयों के माध्यम से हो रहा है मगर इन जलाशयों व इनकी नहरों के पानी निकासी गेटों को हर वर्ष मरम्मत की जरूरत होती है।

जल संसाधन विभाग के स्तर पर रीवा स्थित एएंडएम सेक्शन इन सभी गेटों की अपनी विशेषज्ञ टीम से मानसून से पहले मरम्मत कराता है ताकि मानसून के बाद जलाशयों व नहरों से सिंचाई के लिए तय मात्रा में ही पानी निकासी की जा सके। इसके अभाव में खराब या जाम होने की स्थिति में गेटों से कम या अधिक मात्रा में पानी निकासी की समस्या होती है। इसके तहत ही सामने आया कि इस जिले में काचन सहित कुछ दूसरे जलाशयों व इनसे निकलने वाली नहरों के लगभग 40 गेट जाम की हालत में हैं। इसलिए मानसून से पहले इनकी मरम्मत अनिवार्य है। इसके लिए रीवा स्थित संबंधित सेक्शन की ओर से स्थानीय जल संसाधन विभाग से मरम्मत योग्य गेट के बारे में जानकारी मांगी गई।

मगर जिले के सभी जलाशयों व नहरों के गेटों का परीक्षण कराए जाने के बाद इनकी समीक्षा रिपोर्ट भेजे जाने से पहले ही लाकडाउन आ गया। इस स्थिति में सूचना का आदान-प्रदान अटक गया जबकि लाकडाउन के बाद औपचारिक तौर पर पत्र आदि की प्रक्रिया पूरी होने में लगभग अपे्रल माह बीत जाने के हालात हैंं। इसके बाद रीवा से गेटों की मरम्मत आदि के लिए विशेषज्ञ टीम का कार्यक्रम तय होने में समय लगना है और इसके बाद मरम्मत की कार्रवाई शुरू हो सकेगी। मगर अभी कुछ दिन और इस मामले में यथास्थिति के हालात हैं। इसलिए आशंका है कि इस बार इस अहम काम में विलंब की स्थिति हो सकती है। बताया गया कि काचन सहित सुहेरा व कुछ दूसरे जलाशय के पानी निकासी गेटों को मरम्मत की सख्त जरूरत है। इसी प्रकार काचन जलाशय सहित इसकी नहरों के भी तीन-चार गेटों को मरम्मत की दरकार है।