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दु:ख में दर्द : दुर्घटनाओं के दो दिन बाद शवों को नसीब होती है मुखाग्नि

चीरघरों को सुविधाओं की दरकार, फाइल में दफन होकर रह गए रोगी कल्याण समिति के सुझाव ......

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Rogi Kalyan Samiti suggestions for postmortem house is dump

Rogi Kalyan Samiti suggestions for postmortem house is dump

सिंगरौली. दु:ख में और दर्द। यह किस्सा उन लोगों का है, जो दुर्घटनाओं में अपनों को खो देते हैं। परिजनों को मृतक के शव का अंतिम संस्कार करने के लिए एक से दो दिनों तक का इंतजार करना पड़ रहा है। अव्यवस्था के चलते बनी यह स्थिति दु:खों का पहाड़ टूट के बाद परिजनों को नया दर्द देती है। दुर्घटना सहित अन्य कारणों से हुई मौत के ज्यादातर मामलों में शव को मुखाग्नि दो दिन बाद नसीब हो रही है। इसके पीछे एक नहीं कई कारण हैं।

कहने को तो ग्रामीण अंचल में कई पोस्टमार्टम हाउस बने हैं लेकिन वहां चिकित्सक सहित अन्य व्यवस्थाओं का अभाव है। जहां डॉक्टर मौजूद हैं वहां चीरघर नहीं हैं। यह अव्यवस्था मृतकों के परिजनों को दु:ख में दर्द बांट रहा है। वैसे तो रोगी कल्याण समिति की ओर से चार नए चीरघर बनाए जाने थे, लेकिन यह कवायद फाइल में दफन होकर रह गई है। अब हालात ये हैं कि लंघाडोल में यदि किसी की मौत हो जाती है तो वहां पोस्टमार्टम के लिए चिकित्सक को बुलाना पड़ता है।

जिससे परिजनों को न केवल इंतजार करना पड़ता है बल्कि शव को मुखाग्नि दूसरे दिन भी समय पर नसीब नहीं होती है। ऐसी स्थिति इसलिए बन रही है कि जिला मुख्यालय से करीब 90 किमी दूर लंघाडोल में रहना चिकित्सकों को रास नहीं आ रहा है। यह परेशानी केवल लंघाडोल सहित आसपास के रहवासियों के लिए ही नहीं बल्कि उन परिजनों को अधिक दर्द झेलना पड़ता है जो दु:ख में टूट चुके होते हैं।

केवल मुख्यालय का पोस्टमार्टम हाउस सुविधाओं से लैस
पहले यह समस्या जिला अस्पताल में भी थी लेकिन ट्रामा सेंटर में चीर घर शिफ्ट होने के बाद असुविधाएं दूर हो गई हैं। यहां औजार सहित अन्य सुविधाएं मुहैया कराई गई हैं लेकिन इसके अलावा जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टमार्टम हाउस जर्जर हालत में है। न तो चिकित्सक हैं और न ही जरूरी सुविधाएं। ऐसी स्थिति में पोस्टमार्टम करने में दिक्कतें होती हैं।

यहां केवल नाममात्र के लिए बने हैं चीरघर
तिनगुड़ी, बरका, बैरदह व बगदरा में नाममात्र के लिए चीरघर बने हैं। यहां पोस्टमार्टम नहीं होता है। तिनगुड़ी व बरका में मौत हो जाने पर शव को सरई स्वास्थ्य केंद्र मंगाया जाता है। वहीं बैरदह व बगदरा का चितरंगी में मंगाकर पोस्टमार्टम करते हैं।

उदाहरण के लिए पर्याप्त:
01- लंघाडोल में एक किशोरी ने फांसी लगाकर जान दे दी। पुलिस पंचनामा के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। चिकित्सक नहीं होने के चलते दूसरे दिन शाम तक शव का पोस्टमार्टम हुआ।
02- गढ़वा में सडक़ दुर्घटना में दो युवकों की मौके पर मौत हो गई थी। मर्ग कायम करने के बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। जहां दो दिन बाद शव का पोस्मार्टम कराया गया है।

यहां होता है पोस्टमार्टम:
जिला अस्पताल, लंघाडोल, बरगवां, देवसर, सरई, निवास, तिनगुड़ी, बरका, चितरंगी, बैरदह, बगदरा

यह है हकीकत:
- 11 चीरघर पूरे जिले में
- 04 स्थानों पर नाममात्र के
- 03 से अधिक पोस्टमार्टम रोज होते हैं
- 13 लाख से अधिक आबादी
- 5 लाख से अधिक वाहनों की संख्या

पोस्टमार्टम हाउस

खुटार : लंघाडोल, खनुआ, माड़ा, मोरवा, खुटार
चितरंगी : खटाई, नौडिहवा, बगदरा, कोरसर, कर्थुआ, बगैया, लमसरई, चितरंगी, बैरदह
देवसर : सरई, निवास, बरका, तिनगुड़ी, देवसर, बरगवां