26 जनवरी 2026,

सोमवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

देश के कई शहरों में हवा हुई जहरीली

एयर क्वालिटी इंडेक्स पहुंचा 370 .....

2 min read
Google source verification
Singrauli: Air becomes poisonous in many cities of country

Singrauli: Air becomes poisonous in many cities of country

सिंगरौली. जिले में प्रदूषण को कम करने के लिए किए जा रहे तमाम प्रयासों के बीच मंगलवार 22 मार्च को जिले की हवा देश में सबसे ज्यादा खराब रही। देश के 154 शहरों की जारी एयर क्वालिटी इंडेक्स की सूची में सिंगरौली टॉप पर रहा है। यहां जिले का इंडेक्स 370 दर्ज किया गया। 301 से अधिक इकाई पर वायु की गुणवत्ता सबसे खराब मानी जाती है।

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एप पर जारी एयर क्वालिटी इंडेक्स में सिंगरौली के बाद कटिहार की इंडेक्स 363, दुर्गापुर का 346, भागलपुर व सहरसा का 322 और मुंगेर का 303 बताया गया। जिले में वायु प्रदूषण की सबसे खराब स्थिति के लिए विद्युत उत्पादक कंपनियों और सडक़ मार्ग से हो रहे कोल परिवहन को जिम्मेदार माना जा रहा है। ओबी के पहाड़ों से उड़ती धूल भी बढ़े वायु प्रदूषण के लिए जिम्मेदार बताई जा रही है।

अभी और खराब होगी स्थिति
अधिकारियों के मुताबिक गर्मी में लू की आंधी चलने पर वायु प्रदूषण और बढ़ेगा। अभी विद्युत उत्पादक कंपनियों की चिमनी से निकलने वाला धुआं और कोल परिवहन मुख्य वजह है। गर्मी में तेज हवा चलने पर ओबी के पहाड़ों की धूल व फ्लाइऐश डैम की राख प्रदूषण का सबब बनेगी। ओबी के पहाड़ों और डैम के किनारे बसे गांवों में तो लोगों का सांस लेना दूभर हो जाता है। खाना-पान सभी कुछ प्रदूषित होता है। अभी इसके लिए ठोस इंतजाम नहीं किए गए हैं।

दो दर्जन चिमनियां उगल रही कार्बन व सल्फर
जिले व आसपास के क्षेत्र में विद्युत उत्पादक कंपनियों की 20 चिमनियां 24 घंटे जहरीला धुआं उगलती हैं। धुआं में कार्बन और सल्फर जैसे खतरनाक रासायनिक तत्व होते हैं। हालांकि प्रदूषण को कम करने के लिए चिमनियों में एफजीडी (फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन) सिस्टम लगाने की प्रक्रिया जारी है, लेकिन राहत के लिए अभी वर्ष 2024 तक इंतजार करना होगा। बता दें कि एनटीपीसी विंध्यनगर में छह, एनटीपीसी सिंगरौली शक्तिनगर में चार, हिंडालकों में छह, रिलायंस में तीन व एस्सार पॉवर में एक चिमनी पूरे समय धुआं उगलती हैं।

मोरवा क्षेत्र सबसे अधिक प्रदूषित
जिले में सबसे अधिक प्रदूषित क्षेत्र नगर निगम का मोरवा जोन है। इसकी एक नहीं कई वजह हैं। एक तो यह कि उस क्षेत्र में एनसीएल की सभी खदानें आस-पास संचालित हैं। इसके अलावा उत्तर प्रदेश की विद्युत उत्पादक इकाईयां भी मोरवा जोन लगी हुई हैं। कोयला खनन और परिवहन जैसे अन्य कारणों के चलते वहां वायु प्रदूषण की स्थिति यह है कि सुबह घर के आंगन में सफाई करो तो शाम तक फिर से काली धूल की परत जम जाती है। इसके अलावा जयंत से मोरवा जाने वाली सडक़ भी जिले की सबसे प्रदूषित मार्ग मानी जाती है।