8 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Good news: 3 वन क्षेत्रों में सुनने को मिली टाइगर की दहाड़, जल्द ही MP फिर बनेगा टाइगर स्टेट

वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर को रिपोर्ट, पैंथर की गुर्राहट

2 min read
Google source verification
Singrauli district 3 forest areas in tiger roar can hear

Singrauli district 3 forest areas in tiger roar can hear

सिंगरौली। वन्य जीवों को लेकर सिंगरौली जिले की स्थिति बेहतर होती दिख रही है। माड़ा व सरई वन क्षेत्र में वन विभाग को टाइगर की दहाड़ सुनने को मिली है, साथ ही पैंथर के विचरण के भी संकेत मिले है। वहीं भालुओं की संख्या में इजाफा होना माना जा रहा है। हालांकि टाइगर व पैंथर आदि की अंतिम पुष्टि वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डिया देहरादून ही करेगा है। फिलहाल, प्रारंभिक संकेतों से वनकर्मी उत्साहित नजर आ रहे है।

ऑल इंडिया टाइगर एस्टीमेशन-2018 के तहत जिले की प्रपत्रों में संकलित रिपोर्ट अप्रैल के अंतिम सप्ताह में राज्य वन अनुसंधान संस्थान जबलपुर को भेजी गई है। टाइगर एस्टीमेशन देशभर में हर चार साल में एकसाथ करवाया जाता है। इसके लिए प्रदेश के सारे वन मण्डलों को सात जोन में बांटा गया। सिंगरौली मंडल बांधवगढ़ जोन में रखा गया था।

तीन सदस्यों को मास्टर ट्रेनिंग
चार चक्रों में चलने वाले इस अभियान की सफल क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक वन मण्डल से तीन-तीन कार्मिकों को बांधवगढ़ में मास्टर ट्रेनर द्वारा प्रशिक्षण दिया गया। सिंगरौली से उप वन मण्डल अधिकारी गोरबी ओपीसिंह, वन परिक्षेत्र अधिकारी सरई पश्चिम विनय सिंह तथा वन रक्षक बैढऩ सत्यवीर सिंह ने भाग लिया। इन कार्मिकों को एस्टीमेशन से सम्बन्धित बारीकी से प्रशिक्षण दिया गया। बाद में इन कर्मचारियों ने सभी वन मण्डल कार्मिकों को इसकी ट्रेनिंग दी।

मॉक एक्सरसाइज
इसके बाद जनवरी में ही मॉक एक्सरसाइज की गई। इस दौरान कर्मचारियों से डेटा शीट तैयारी की गई। उसकी 10 फरवरी तक चेकिंग हुई। मॉक एक्सरसाइज के दरमियान पॉइंट पर जो भी मिला, उसका डेटा एंट्री विशेष सॉफ्टवेयर में की गई। उक्त सॉफ्टवेयर वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इण्डिया देहरादून द्वारा तैयार किया गया।

171 बीटों में चिह्नीकरण
इसके बाद एस्टीमेशन का अंतिम चरण आया। रियल एस्टीमेशन के तौर पर 9 से 15 मार्च तक जिले की सभी 9 रेंज की 171 बीट में कर्मचारी लगाए गए। मांसाहारी व शाकाहारी वन्य जीवों के दो अलग-अलग वर्ग बनाए गए थे। इस दौरान माडा व सरई तथा पश्चिम सरई उप वन मण्डल क्षेत्र में बाघ व चीते को लेकर सकारात्मक संकेत मिले।

पदचिह्न और विष्ठा से आकलन
वन विभाग के अनुसार जिले का माड़ा इलाका छत्तीसगढ़ की एक सेंचुरी तो सरई पश्चिम संजय गांधी टाइगर रिजर्व सीधी से सटा है। इन दोनों उप मंडल क्षेत्रों में टाइगर व पैंथर के पदचिह्न के साथ विष्ठा आदि पाए गए। इसके अलावा भालुओं के कुनबे में इजाफा होना बताया गया है। साथ ही लकड़बघ्घा, जंगली बिल्ली आदि वन्य जीव भी देखे गए हैं।

टाइगर एस्टीमेशन पर फरवरी में काम हुआ था। विभिन्न चरणों में चिह्निकरण का यह दौर पूरा हुआ। इसमें टाइगर, पैंथर आदि वन्यजीवों के विचरण के स्पष्ट संकेत मिले हैं। इसे लेकर कर्मचारियों में भी खासा उत्साह है। टाइगर, पैंथर आदि की मौजूदगी की अंतिम पुष्टि देहरादून से ही होगी।
ओपीसिंह बघेल, नोडल अधिकारी, टाइगर एस्टीमेशन सिंगरौली