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सोन में रेत का अवैध कारोबार, चितरंगी तहसील के दर्जनों गांवों का मामला

सोन घडिय़ाल का मैदानी अमला व पुलिस बने सहयोगी....

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Son river sand illegal trade , sand going from Singrauli to UP

Son river sand illegal trade , sand going from Singrauli to UP

सिंगरौली. चितरंगी तहसील मेंं सोन नदी का पूरा क्षेत्र दबंगई से रेत के अवैध खनन के कारण कराह रहा है। नदी में रात के अंधेरे में ही नहीं, दिन मेंंं भी मशीनों से रेत का अवैध खनन चल रहा है। नदी के घडिय़ाल क्षेत्र के जिले मैदानी अमले पर इसे रोकने की जिम्मेवारी है, वह और पुलिस दोनों इस गंभीर मामले में कोई कार्रवाई करने की जगह दर्शक बने बैठे हैं। इस प्रकार अवैध कारोबारी नदी से रेत के अवैध खनन के जरिए रुपया बटोर रहे हैं तो मैदान अमला व पुलिस उनको संरक्षण देकर इसके बदले जेब भर रहे हैं।

सामने आया कि चितरंगी तहसील के सोन घडिय़ाल क्षेत्र वाले लगभग एक दर्जन गावों में काफी समय से नदी से रेत का बड़े पैमाने पर हो रहा अवैध खनन कानून को चुनौती दे रहा है। बताया गया कि वहां गांव बर्दी, धरौली, चिकनी, खटाई, बिछी, बरवाडीह, रमडिहा, हरमा, ठटरा, माचीकला, खैडार, देउरा सहित नदी के आसपास वाले गांवों में माफिया से जुड़े लोग खुले आम रेत खनन कर रहे हैं और अवैध खनन के बाद यही रेत पुलिस के संरक्षण में ट्रकों व अन्य बड़े वाहनों मेंं यूपी के बाजार तक कारोबार के लिए पहुंच रही है।

सूत्रों का कहना है कि पूरी तहसील में ये अवैध कारोबार पुलिस की रजामंदी से चलता है। शिकायत है कि सत्तारूढ़ दल के कुछ नेताओं की अगुवाई में ये कारोबार चल रहा है। जबकि इसे रोकने की जगह सोन घडिय़ाल का मैदानी अमला व पुलिस खनन माफिया की सहयोगी भूमिका में हैं।

जबकि नियमानुसार सोन घडिय़ाल को जलचर जीवों की मौजूदगी के चलते बेहद संवेदनशील माना गया है। वहां लगातार अवैध खनन के कारण इस संवेदनशील क्षेत्र का जल व जलचर जीवों का संतुलन बिगडऩे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। मगर प्राकृतिक संतुलन बिगाडऩे वाली इस कार्रवाई को रोकने के लिए जिम्मेवार एजेंसियां व उनके अधिकारी हर खतरे की अनदेखी करते हुए खनन का हिस्सा बने हुए हैं। इससे चिंता बढ़ रही है।

नदी मेंं बना डाला रास्ता
सामने आया कि खनन माफिया ने अपनी सुविधा के लिए नदी के बीच में बाधा खड़ी करते हुए कई जगह रास्ता बना डाला। इससे नदी का प्राकृतिक बहाव रूक गया या पानी का प्रवाह प्रभावित हो रहा है। आसपास के जीव-जंतुओं पर इसका विपरीत असर पड़ सकता है। ये अवैध रास्ते नदी से खनन की गई रेत को ट्रकों में लादकर किनारे लाने का जरिया बने हैं।